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23 September 2017

24 सितंबर 2017 का मौसम पूर्वानुमान

निम्न दबाव का प्रभावी क्षेत्र आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश के उत्तर और पश्चिमी हिस्सों तथा उत्तराखंड पर पहुँच गया है। इसके अलावा एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी आसपास के भागों पर विकसित हो गया है।
पश्चिमी विक्षोभ पूर्वी जम्मू कश्मीर पर बना हुआ है।
मॉनसून की अक्षीय रेखा इस समय पश्चिम में हिमालय के तराई क्षेत्रों से हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तरी बिहार होते हुए अरुणाचल प्रदेश तक बनी हुई है।
बंगाल की खाड़ी के मध्य से तटीय तमिलनाडु तक एक ट्रफ रेखा बनी हुई है। इसके साथ-साथ तमिलनाडु के तटीय भागों पर बंगाल की खाड़ी में ही एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी बना हुआ है।
उत्तरी पाकिस्तान और इससे सटे जम्मू कश्मीर के पास एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी विकसित हो गया है।
पिछले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरी मध्य प्रदेश और हरियाणा के कुछ भागों में भारी से अति भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जगहों पर हल्की से मध्यम बौछारें दर्ज की गई हैं।
गुजरात और राजस्थान के अधिकांश हिस्सों को छोड़कर देश के बाकी भागों में कुछ स्थानों पर गरज के साथ हल्की बारिश देखने को मिली।
अगले 24 घंटों के दौरान उत्तरी हरियाणा, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इन भागों में एक-दो स्थानों पर मूसलाधार वर्षा भी हो सकती है। भारी बारिश दिन के पहले भाग में होगी। दोपहर तक वर्षा में कमी आने के आसार हैं।
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी कुछ जगहों पर मध्यम बारिश होने के आसार हैं।
दक्षिणी ओड़ीशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पूर्वोत्तर भारत के बाकी भागों, पूर्वी जम्मू कश्मीर, तेलंगाना और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हल्की मॉनसून वर्षा हो सकती है।.............www.skymet.com
गुजरात के कच्छ क्षेत्र, पश्चिमी राजस्थान और पंजाब में मौसम शुष्क बना रहेगा।
राजस्थान और गुजरात के तापमान में वृद्धि होने के आसार हैं।

एग्री कमोडिटी दैनिक न्यूज के लिए सुनहरा मौका

खरीफ फसलें सोयाबीन, मूंगफली, केस्टर सीड, ग्वार सीड, धान, बाजरा, मक्का, मूंग, उड़द, अरहर तथा कपास आदि की नई फसल की आवक उत्पादक मंडियों में अक्टूबर में चालू हो जायेगी, तथा इस बार कैसा रहगा जिंसों का बाजार, आगे किस-किस कमोडिटी में निवेश करने से होगा फायदा, या फिर किस कमोडिटी में बनेगी बड़ी तेजी, आयात और निर्यात के साथ ही केंद्र सरकार की नीतियां कैसी रहेगी, इस सब की जानकारी के लिए हमसे जुड़े। 
एग्री कमोडिटी में दैनिक न्यूज ई-मेल के माध्यम से हिंदी में मिलेंगी। इसमें आपको हर रोज एग्री जिंसों दलहन, तिलहन, ग्वार सीड, चीनी, गेहूं, मोटे अनाज, चावल तथा मसालों की तेजी-मंदी की जानकारी, निर्यात-आयात की खबरों के अलावा सरकार की नीतियां, उत्पादन तथा पैदावार की जानकारी दी जायेगी। प्रमुख उत्पादक मंडियों के एग्री जिसों के भाव शाम 5 बचे तक मिलेंगे। यह स्कीम केवल 15 अक्टूबर 2017 तक है, उसके बाद सदस्यता शुल्क बढ़ेगा।

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आर एस राणा
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अरहर और मूंग की बुवाई में आई कमी, उड़द की ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में अरहर के साथ ही मूंग की बुवाई में कमी आई है, लेकिन उड़द की बुवाई पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार अरहर की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 43.26 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 52.77 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द और मूंग की दैनिक आवक मौसम साफ होने के बाद बढ़ने का अनुमान है, जिससे अक्टूबर में इनके भाव में गिरावट आ सकती है। जानकारों के अनुसार बारिश सामान्य से कम होने के कारण मूंग की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता कम होने से उत्पादन में कमी आने की आशंका है, ऐसे में दिसंबर-जनवरी में भाव तेज होने का अनुमान है। अरहर के उत्पादन में तो कमी आने की आशंका है, लेकिन केंद्रीय पूल में स्टॉक ज्यादा होने से भाव में बड़ी तेजी की उम्मीद अभी नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र के साथ ही मध्य प्रदेश, कर्नाटका, तेलंगाना के साथ ही आंध्रप्रदेश में भी अरहर की बुवाई कम हुई है। महाराष्ट्र में चालू खरीफ में अरहर की बुवाई घटकर 12.73 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 15.31 लाख हैक्टेयर में अरहर की बुवाई हो चुकी थी। कर्नाटका में अरहर की बुवाई घटकर 8.79 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 11.91 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। इसी तरह से मध्य प्रदेश में बुवाई घटकर 6.51 लाख हैक्टेयर में, गुजरात में 2.70 लाख हैक्टेयर में, आंध्रप्रदेश में 2.47 लाख हैक्टेयर में, तेलंगाना में 2.51 लाख हैक्टेयर में और उत्तर प्रदेश में बुवाई 3.36 लाख हैक्टेयर में हुई है।
मूंग की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 31.73 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में मूंग की बुवाई 34.50 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। राजस्थान में मूंग की बुवाई चालू खरीफ में 15.70 लाख हैक्टेयर में, महाराष्ट्र में 5.52 लाख हैक्टेयर में, मध्य प्रदेश में 2.28 लाख हैक्टेयर में और कर्नाटका में 3.67 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।
उड़द की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 42.88 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई केवल 35.26 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुवाई मध्य प्रदेश में बढ़कर 17.89 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक मध्य प्रदेश में केवल 11.68 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। अन्य राज्यों में महाराष्ट्र में 4.83 लाख हैक्टेयर में, उड़ीसा में 2.42 लाख हैक्टेयर में, राजस्थान में 5.40 लाख हैक्टेयर में और उत्तर प्रदेश में 5.96 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।.................    आर एस राणा

बारिश की कमी से धान के साथ ही दलहन व तिलहन की बुवाई घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में देश के कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण धान, दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में तो कमी आई है, लेकिन कपास के साथ ही गन्ने की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की कुल बुवाई घटकर अभी तक केवल 1,054.97 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,063.28 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू खरीफ में घटकर 376.76 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रौपाई 381.75 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई घटकर 141.18 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक दलहन की बुवाई 146.26 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों में अरहर के साथ ही मूंग की बुवाई में तो चालू खरीफ में कमी आई है लेकिन उड़द की बुवाई पिछले साल से ज्यादा हुई है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 172.94 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 189.45 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनों में सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई भी पिछड़ रही है। सोयाबीन की बुुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 105.91 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 114.72 लाख हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी थी। मूंगफली की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर 41.52 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 46.88 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। केस्टर सीड की बुवाई भी चालू खरीफ में पिछड़ रही है। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई घटकर 8.17 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.39 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में पिछले साल की तुलना में घटकर अभी तक केवल 185.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 190.06 लाख हैक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में जहां बाजरा की बुवाई में हल्की बढ़ोतरी हुई है वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई में कमी आई है।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 121.72 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 102.56 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 49.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.64 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।...............   आर एस राणा

22 September 2017

एमसीएक्स पर कमोडिटी ऑप्शंस

सेबी ने कमोडिटी ऑप्शंस पर गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। इसके तहत कमोडिटी फ्यूचर्स में ऑप्शंस ट्रेडिंग को मंजूरी दी गई है। सेबी के मुताबिक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर फिलहाल सिर्फ 1 ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दी गई है। जिसमें नॉन-एग्री कमोडिटी ऑप्शंस के लिए रोजाना 1,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर जरूरी होगा। जबकि एग्री फ्यूचर्स के ऑप्शंस के लिए रोजाना 200 करोड़ रुपये का टर्नओवर जरूरी होगा। फिलहाल किस कमोडिटी में ऑप्शंस ट्रेडिंग होगी इसके बारे में कमोडिटी एक्सचेंजों को फैसला लेना है।
एमसीएक्स सोने में ऑप्शंस ट्रेडिंग शुरु करने जा रहा है जिसके लिए एमसीएक्स पर जोरदार तैयारी चल रही है। कमोडिटी ऑप्शंस, कमोडिटी में हेजिंग का नया जरिया है जिससे कमोडिटी में हेजिंग आसान होगी लेकिन इससे पहले जान लेते है कि कमोडिटी ऑप्शंस क्या है।
ऑप्शंस, एक करार जो खरीदार को खरीदारी का हक देता है, लेकिन जरूरी नहीं कि किसी भी दाम पर या तय वक्त से पहले वह खरीदने या बेचने का फैसला लें। कॉल ऑप्शन फ्यू्चर के तहत बढ़ते दाम से सुरक्षा के लिए हेजिंग की जा सकती है जिसमें असीमित मुनाफे का मौका होता है। वहीं पुट ऑप्शन के तहत सीमित मुनाफे की संभवना के साथ गिरती कीमतों से सुरक्षा मिलती है।

23 सितंबर 2017 के लिए मॉनसून पूर्वानुमान

पिछले 24 घंटों में मॉनसून उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा कोंकण और गोवा के कुछ हिस्सों में व्यापक रूप से सक्रिय रहा। वहीं मॉनसून शेष महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में सक्रिय रहा।
जबकि केरल, तटीय कर्नाटक, उत्तर तमिलनाडु, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा के कुछ हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों के बाकी हिस्सों में सामान्य मॉनसून की स्थिति देखी गई।
पिछले 24 घंटों में हरनई में 319 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, वहीं शाजापुर में 139 मिमी और भीरा में 119 मिमी बारिश रेकॉर्ड की गयी।
21 सितंबर तक देश भर के बारिश के आंकड़े में 5% की कमी रही। जहां तक क्षेत्रीय वितरण की बात करें, उत्तर पश्चिमी भारत, मध्य और दक्षिण भारत में 11%, 5% और 1% की कमी देखी जा सकती है।
वर्तमान में मॉनसून की अक्षीय रेखा बीकानेर, अजमेर, गहरे निम्न दबाव के क्षेत्र, पेंडरा, झारसुगुडा और पारादीप से पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी की तरफ जा रही है।
अगले 24 घंटों के दौरान मॉनसून उत्तराखंड और उत्तर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हिस्सों पर व्यापक रूप से सक्रिय रहेगा।
इस बीच मॉनसून दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों, मध्य महाराष्ट्र, कोंकण और गोवा के कुछ हिस्सों, मध्य प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों पर सक्रिय रहेगा। सामान्य मॉनसून की स्थिति ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, मेघालय, तटीय आंध्र प्रदेश और तटीय कर्नाटक पर देखी जा सकती है।........www.skymet.com

21 September 2017

सोने में निचले स्तर से हल्की रिकवरी

कल की भारी गिरावट के बाद आज सोने में निचले स्तर से हल्की रिकवरी आई है। कॉमैक्स पर इसका भाव अभी भी 1300 डॉलर के नीचे बना हुआ है। चांदी में भी हल्की बढ़त आई है। लेकिन इसे बावजूद भाव 17 डॉलर के नीचे है। डॉलर में ऊपरी स्तर से कुछ दबाव दिख रहा है। ओपेक और दूसरे तेल उत्पादक देशों की विएना में अहम बैठक है। माना जा रहा है कि इस इस बैठक में नाइजीरिया और लीबिया जैसे देशों को भी उत्पादन कटौती का हिस्सा बनाने पर बात हो सकती है। इन दोनों देशों को भी इस बैठक में शामिल होना है। ऐसे में कच्चे तेल में बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है। ब्रेंट 56 डॉलर और नायमैक्स क्रूड लगातार 50 डॉलर के ऊपर बना हुआ है।  डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी बढ़ गई है और एक डॉलर की कीमत पैंसठ रुपए के ऊपर चली गई है। डॉलर के मुकाबले रुपया 4 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया है।