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25 फ़रवरी 2015

इनसेंटिव से भी नहीं मिला चीनी की कीमतों को सहारा


पेराई सत्र समाप्ति की ओर, 14 लाख टन रॉ-षुगर निर्यात की उम्मीद कम
आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा चीनी मिलों को रॉ-षुगर के निर्यात पर इनसेंटिव देने से भी चीनी की कीमतों को सहारा नहीं मिल पाया। बुधवार को दिल्ली थोक बाजार में चीनी की कीमतों में 100 रूपये की गिरावट आकर भाव 2,800 से 2,850 रूपये प्रति क्विंटल रह गए। जानकारों के अनुसार चीनी का पेराई सत्र समाप्ति की ओर है ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा तय किए 14 लाख टन रॉ-षुगर के निर्यात की संभावना भी काफी कम है।
चीनी के थोक कारोबारी सुधीर भालोठिया ने बताया कि चालू सीजन में चीनी का उत्पादन 260 लाख टन से भी ज्यादा होने का अनुमान है इसीलिए केंद्र सरकार द्वारा चीनी मिलों को रॉ-षुगर के निर्यात पर 4,000 रूपये प्रति टन की दर से सब्सिडी देने के बावजूद भी कीमतों में सुधार नहीं हो रहा है। उत्तर प्रदेष में चीनी की एक्स-फैक्टी कीमत बुधवार को घटकर 2,700 से 2,750 रूपये प्रति क्विंटल रह गई जबकि दिल्ली में थोक कीमतें घटकर 2,800 से 2,850 रूपये प्रति क्विंटल रह गई। मुंबई में चीनी के दाम घटकर इस दौरान 2,400 से 2,450 रूपये प्रति क्विंटल रह गए।
षुगर उद्योग से जुड़े एक वरिश्ठ अधिकारी ने बताया कि चालू पेराई सीजन 2014-15 अब समाप्ति की ओर है ऐसे में 14 लाख टन रॉ-षुगर निर्यात की संभावना काफी कम है। सरकार ने इनसेंटिव की घोशणा में देरी कर दी, इसका खामियाजा चीनी मिलों के साथ ही किसानों को भी उठाना पड़ेगा। चीनी की कीमतों में चल रही गिरावट के कारण ही चीनी मिलों पर किसानों के बकाया का बोझ लगातार बढ़ रहा है।
चीनी के व्यापारी आर पी गर्ग ने बताया कि विष्व बाजार में रॉ-षुगर के दाम 340 डॉलर प्रति टन और व्हाईट षुगर के 380 डॉलर प्रति टन है। इन भाव में भारत से निर्यात के पड़ते नहीं है तथा विष्व बाजार में अभी कीमतों में सुधार की संभावना नहीं है। ऐसे में घरेलू बाजार में चीनी की कीतमों में अभी तेजी की संभावना भी नहीं है।
इंडियन षुगर मिल्स एसोसिएषन (इस्मा) के अनुसार चालू पेराई सीजन 2014-15 (अक्टूबर से सितंबर) में 15 फरवरी 2015 तक देषभर 167.08 लाख टन चीनी का उत्पादन हो चुका है जोकि पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 15 फीसदी ज्यादा है।......  आर एस राणा

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