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17 दिसंबर 2015

निर्यात बढऩे से घटेगा चीनी का भंडार


उम्मीद है विपणन वर्ष 2016-17 की शुरुआत में देश का चीनी भंडार 26.4 फीसदी घटकर 67 लाख टन रह जाएगा। दुनिया में चीनी के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक देश द्वारा निर्यात में इजाफा किए जाने से चीनी का भंडार कम होगा। भारतीय निर्यात बढऩे से वैश्विक कीमतों पर दबाव बढ़ेगा लेकिन स्थानीय बाजारों को मजबूती मिलेगी और गन्ने के लिए राज्य द्वारा तय की गई कीमतों पर मिलों को किसानों का भुगतान करने में सहायता मिलेगी। भारत ने 1 अक्टूबर को 2015-16 की शुरुआत 91 लाख टन चीनी के भंडार के साथ की थी।
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (इस्मा) के अध्यक्ष ए वेल्लयन ने कहा, 'हम निश्चित रूप से 10 लाख से 12 लाख टन सफेद चीनी का निर्यात कर सकते हैं। इसके साथ ही हम 20 लाख टन कच्ची चीनी का निर्यात कर सकते हैं।' ब्राजील, थाईलैंड और पाकिस्तान से मुकाबला करने वाला भारत आम तौर पर सफेद चीनी का ही उत्पादन करता है। देश में श्रीलंका और पश्चिम एशिया एवं अफ्रीका के खरीदारों को निर्यात करने के लिए ही कच्ची चीनी का उत्पादन किया जाता है। चालू सीजन में मिलों ने अब तक 6,00,000 टन चीनी निर्यात के सौदों पर हस्ताक्षर किए हैं, इसमें इंडियन शुगर एक्जिम कॉरपोरेशन द्वारा किया गया 1,25,000 टन का सौदा भी शामिल है।
एक अन्य कारोबारी संगठन के अधिकारी ने कहा कि 3,00,000 टन चीनी पहले ही भेजी जा चुकी है और बाकी चीनी आने वाले दो तीन महीनों में भेज दी जाएगी। सरकार देसी मिलों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चीनी बेचने के लिए प्रेरित कर रही है और इससे होने वाली कमाई से गन्ना किसानों का बकाया चुकाने के निर्देश दिए गए हैं। पिछले कुछ सालों से कर्ज के बोझ से दबी मिलें अपने मुख्य चीनी कारोबार से इतर कमाई करने के साधन तलाश रही हैं क्योंकि स्थानीय बाजार में चीनी की कीमतें काफी नीचे गिर गई हैं। वेल्लयन ने कहा चीनी मिलें एथेनॉल की आपूर्ति दोगुनी होने की उम्मीद कर रही हैं। गैसोलीन के मुकाबले एथेनॉल स्वच्छ ईंधन का विकल्प है।  (BS Hindi)

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