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23 September 2017

24 सितंबर 2017 का मौसम पूर्वानुमान

निम्न दबाव का प्रभावी क्षेत्र आगे बढ़ते हुए उत्तर प्रदेश के उत्तर और पश्चिमी हिस्सों तथा उत्तराखंड पर पहुँच गया है। इसके अलावा एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी आसपास के भागों पर विकसित हो गया है।
पश्चिमी विक्षोभ पूर्वी जम्मू कश्मीर पर बना हुआ है।
मॉनसून की अक्षीय रेखा इस समय पश्चिम में हिमालय के तराई क्षेत्रों से हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तरी बिहार होते हुए अरुणाचल प्रदेश तक बनी हुई है।
बंगाल की खाड़ी के मध्य से तटीय तमिलनाडु तक एक ट्रफ रेखा बनी हुई है। इसके साथ-साथ तमिलनाडु के तटीय भागों पर बंगाल की खाड़ी में ही एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी बना हुआ है।
उत्तरी पाकिस्तान और इससे सटे जम्मू कश्मीर के पास एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी विकसित हो गया है।
पिछले 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरी मध्य प्रदेश और हरियाणा के कुछ भागों में भारी से अति भारी वर्षा रिकॉर्ड की गई है।
पूर्वी उत्तर प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर भारत और पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी कई जगहों पर हल्की से मध्यम बौछारें दर्ज की गई हैं।
गुजरात और राजस्थान के अधिकांश हिस्सों को छोड़कर देश के बाकी भागों में कुछ स्थानों पर गरज के साथ हल्की बारिश देखने को मिली।
अगले 24 घंटों के दौरान उत्तरी हरियाणा, उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में मध्यम से भारी बारिश होने की संभावना है। इन भागों में एक-दो स्थानों पर मूसलाधार वर्षा भी हो सकती है। भारी बारिश दिन के पहले भाग में होगी। दोपहर तक वर्षा में कमी आने के आसार हैं।
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, असम और अरुणाचल प्रदेश में भी कुछ जगहों पर मध्यम बारिश होने के आसार हैं।
दक्षिणी ओड़ीशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, पूर्वोत्तर भारत के बाकी भागों, पूर्वी जम्मू कश्मीर, तेलंगाना और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हल्की मॉनसून वर्षा हो सकती है।.............www.skymet.com
गुजरात के कच्छ क्षेत्र, पश्चिमी राजस्थान और पंजाब में मौसम शुष्क बना रहेगा।
राजस्थान और गुजरात के तापमान में वृद्धि होने के आसार हैं।

एग्री कमोडिटी दैनिक न्यूज के लिए सुनहरा मौका

खरीफ फसलें सोयाबीन, मूंगफली, केस्टर सीड, ग्वार सीड, धान, बाजरा, मक्का, मूंग, उड़द, अरहर तथा कपास आदि की नई फसल की आवक उत्पादक मंडियों में अक्टूबर में चालू हो जायेगी, तथा इस बार कैसा रहगा जिंसों का बाजार, आगे किस-किस कमोडिटी में निवेश करने से होगा फायदा, या फिर किस कमोडिटी में बनेगी बड़ी तेजी, आयात और निर्यात के साथ ही केंद्र सरकार की नीतियां कैसी रहेगी, इस सब की जानकारी के लिए हमसे जुड़े। 
एग्री कमोडिटी में दैनिक न्यूज ई-मेल के माध्यम से हिंदी में मिलेंगी। इसमें आपको हर रोज एग्री जिंसों दलहन, तिलहन, ग्वार सीड, चीनी, गेहूं, मोटे अनाज, चावल तथा मसालों की तेजी-मंदी की जानकारी, निर्यात-आयात की खबरों के अलावा सरकार की नीतियां, उत्पादन तथा पैदावार की जानकारी दी जायेगी। प्रमुख उत्पादक मंडियों के एग्री जिसों के भाव शाम 5 बचे तक मिलेंगे। यह स्कीम केवल 15 अक्टूबर 2017 तक है, उसके बाद सदस्यता शुल्क बढ़ेगा।

एक महीने का सदस्यता शुल्क 1,000 रुपये, 6 महीने का सदस्यता शुल्क 5,000 रुपये और एक साल का सदस्यता शुल्क 8,000 रुपये है।
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आर एस राणा
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अरहर और मूंग की बुवाई में आई कमी, उड़द की ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में अरहर के साथ ही मूंग की बुवाई में कमी आई है, लेकिन उड़द की बुवाई पिछले साल की तुलना में ज्यादा हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार अरहर की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 43.26 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 52.77 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। उड़द और मूंग की दैनिक आवक मौसम साफ होने के बाद बढ़ने का अनुमान है, जिससे अक्टूबर में इनके भाव में गिरावट आ सकती है। जानकारों के अनुसार बारिश सामान्य से कम होने के कारण मूंग की प्रति हैक्टेयर उत्पादकता कम होने से उत्पादन में कमी आने की आशंका है, ऐसे में दिसंबर-जनवरी में भाव तेज होने का अनुमान है। अरहर के उत्पादन में तो कमी आने की आशंका है, लेकिन केंद्रीय पूल में स्टॉक ज्यादा होने से भाव में बड़ी तेजी की उम्मीद अभी नहीं है।
मंत्रालय के अनुसार प्रमुख उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र के साथ ही मध्य प्रदेश, कर्नाटका, तेलंगाना के साथ ही आंध्रप्रदेश में भी अरहर की बुवाई कम हुई है। महाराष्ट्र में चालू खरीफ में अरहर की बुवाई घटकर 12.73 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 15.31 लाख हैक्टेयर में अरहर की बुवाई हो चुकी थी। कर्नाटका में अरहर की बुवाई घटकर 8.79 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 11.91 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। इसी तरह से मध्य प्रदेश में बुवाई घटकर 6.51 लाख हैक्टेयर में, गुजरात में 2.70 लाख हैक्टेयर में, आंध्रप्रदेश में 2.47 लाख हैक्टेयर में, तेलंगाना में 2.51 लाख हैक्टेयर में और उत्तर प्रदेश में बुवाई 3.36 लाख हैक्टेयर में हुई है।
मूंग की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 31.73 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में मूंग की बुवाई 34.50 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। राजस्थान में मूंग की बुवाई चालू खरीफ में 15.70 लाख हैक्टेयर में, महाराष्ट्र में 5.52 लाख हैक्टेयर में, मध्य प्रदेश में 2.28 लाख हैक्टेयर में और कर्नाटका में 3.67 लाख हैक्टेयर में ही हुई है।
उड़द की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 42.88 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई केवल 35.26 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। उड़द की बुवाई मध्य प्रदेश में बढ़कर 17.89 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक मध्य प्रदेश में केवल 11.68 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। अन्य राज्यों में महाराष्ट्र में 4.83 लाख हैक्टेयर में, उड़ीसा में 2.42 लाख हैक्टेयर में, राजस्थान में 5.40 लाख हैक्टेयर में और उत्तर प्रदेश में 5.96 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है।.................    आर एस राणा

बारिश की कमी से धान के साथ ही दलहन व तिलहन की बुवाई घटी

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन में देश के कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण धान, दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में तो कमी आई है, लेकिन कपास के साथ ही गन्ने की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की कुल बुवाई घटकर अभी तक केवल 1,054.97 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,063.28 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू खरीफ में घटकर 376.76 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रौपाई 381.75 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई घटकर 141.18 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक दलहन की बुवाई 146.26 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों में अरहर के साथ ही मूंग की बुवाई में तो चालू खरीफ में कमी आई है लेकिन उड़द की बुवाई पिछले साल से ज्यादा हुई है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 172.94 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 189.45 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनों में सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई भी पिछड़ रही है। सोयाबीन की बुुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 105.91 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 114.72 लाख हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी थी। मूंगफली की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर 41.52 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 46.88 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। केस्टर सीड की बुवाई भी चालू खरीफ में पिछड़ रही है। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई घटकर 8.17 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.39 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में पिछले साल की तुलना में घटकर अभी तक केवल 185.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 190.06 लाख हैक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में जहां बाजरा की बुवाई में हल्की बढ़ोतरी हुई है वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई में कमी आई है।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 121.72 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 102.56 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 49.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.64 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।...............   आर एस राणा

22 September 2017

एमसीएक्स पर कमोडिटी ऑप्शंस

सेबी ने कमोडिटी ऑप्शंस पर गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। इसके तहत कमोडिटी फ्यूचर्स में ऑप्शंस ट्रेडिंग को मंजूरी दी गई है। सेबी के मुताबिक पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर फिलहाल सिर्फ 1 ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट को मंजूरी दी गई है। जिसमें नॉन-एग्री कमोडिटी ऑप्शंस के लिए रोजाना 1,000 करोड़ रुपये का टर्नओवर जरूरी होगा। जबकि एग्री फ्यूचर्स के ऑप्शंस के लिए रोजाना 200 करोड़ रुपये का टर्नओवर जरूरी होगा। फिलहाल किस कमोडिटी में ऑप्शंस ट्रेडिंग होगी इसके बारे में कमोडिटी एक्सचेंजों को फैसला लेना है।
एमसीएक्स सोने में ऑप्शंस ट्रेडिंग शुरु करने जा रहा है जिसके लिए एमसीएक्स पर जोरदार तैयारी चल रही है। कमोडिटी ऑप्शंस, कमोडिटी में हेजिंग का नया जरिया है जिससे कमोडिटी में हेजिंग आसान होगी लेकिन इससे पहले जान लेते है कि कमोडिटी ऑप्शंस क्या है।
ऑप्शंस, एक करार जो खरीदार को खरीदारी का हक देता है, लेकिन जरूरी नहीं कि किसी भी दाम पर या तय वक्त से पहले वह खरीदने या बेचने का फैसला लें। कॉल ऑप्शन फ्यू्चर के तहत बढ़ते दाम से सुरक्षा के लिए हेजिंग की जा सकती है जिसमें असीमित मुनाफे का मौका होता है। वहीं पुट ऑप्शन के तहत सीमित मुनाफे की संभवना के साथ गिरती कीमतों से सुरक्षा मिलती है।

23 सितंबर 2017 के लिए मॉनसून पूर्वानुमान

पिछले 24 घंटों में मॉनसून उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश तथा कोंकण और गोवा के कुछ हिस्सों में व्यापक रूप से सक्रिय रहा। वहीं मॉनसून शेष महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, असम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में सक्रिय रहा।
जबकि केरल, तटीय कर्नाटक, उत्तर तमिलनाडु, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा के कुछ हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों के बाकी हिस्सों में सामान्य मॉनसून की स्थिति देखी गई।
पिछले 24 घंटों में हरनई में 319 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, वहीं शाजापुर में 139 मिमी और भीरा में 119 मिमी बारिश रेकॉर्ड की गयी।
21 सितंबर तक देश भर के बारिश के आंकड़े में 5% की कमी रही। जहां तक क्षेत्रीय वितरण की बात करें, उत्तर पश्चिमी भारत, मध्य और दक्षिण भारत में 11%, 5% और 1% की कमी देखी जा सकती है।
वर्तमान में मॉनसून की अक्षीय रेखा बीकानेर, अजमेर, गहरे निम्न दबाव के क्षेत्र, पेंडरा, झारसुगुडा और पारादीप से पूर्वी-मध्य बंगाल की खाड़ी की तरफ जा रही है।
अगले 24 घंटों के दौरान मॉनसून उत्तराखंड और उत्तर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हिस्सों पर व्यापक रूप से सक्रिय रहेगा।
इस बीच मॉनसून दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के बाकी हिस्सों, मध्य महाराष्ट्र, कोंकण और गोवा के कुछ हिस्सों, मध्य प्रदेश और बिहार के कुछ हिस्सों पर सक्रिय रहेगा। सामान्य मॉनसून की स्थिति ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, मेघालय, तटीय आंध्र प्रदेश और तटीय कर्नाटक पर देखी जा सकती है।........www.skymet.com

21 September 2017

सोने में निचले स्तर से हल्की रिकवरी

कल की भारी गिरावट के बाद आज सोने में निचले स्तर से हल्की रिकवरी आई है। कॉमैक्स पर इसका भाव अभी भी 1300 डॉलर के नीचे बना हुआ है। चांदी में भी हल्की बढ़त आई है। लेकिन इसे बावजूद भाव 17 डॉलर के नीचे है। डॉलर में ऊपरी स्तर से कुछ दबाव दिख रहा है। ओपेक और दूसरे तेल उत्पादक देशों की विएना में अहम बैठक है। माना जा रहा है कि इस इस बैठक में नाइजीरिया और लीबिया जैसे देशों को भी उत्पादन कटौती का हिस्सा बनाने पर बात हो सकती है। इन दोनों देशों को भी इस बैठक में शामिल होना है। ऐसे में कच्चे तेल में बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है। ब्रेंट 56 डॉलर और नायमैक्स क्रूड लगातार 50 डॉलर के ऊपर बना हुआ है।  डॉलर के मुकाबले रुपए में कमजोरी बढ़ गई है और एक डॉलर की कीमत पैंसठ रुपए के ऊपर चली गई है। डॉलर के मुकाबले रुपया 4 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया है।

22 सितंबर 2017 के लिए मॉनसून पूर्वानुमान

पिछले 24 घंटों में, दक्षिण पश्चिम मॉनसून कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश के कई हिस्सों, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम पर व्यापक रूप से सक्रिय रहा।
इस बीच, मॉनसून तटीय कर्नाटक, विदर्भ, छत्तीसगढ़, आंतरिक उड़ीसा, उत्तर प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों और पूर्वोत्तर राज्यों पर सक्रिय रहा।
पिछले 24 घंटों में, सागर में 132 मिमी वर्षा दर्ज़ की गयी, वहीं अलिबाग में 108 मिमी और दमोह में 101 मिमी बारिश रेकॉर्ड की गयी।
20 सितंबर को, देश भर के बारिश के आंकड़े में 5% की कमी बनी हुई है। जहां तक क्षेत्रीय वितरण की बात करें तो उत्तर पश्चिमी, मध्य और पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में 11%, 6% और 3% कम बारिश देखी गयी।
वर्तमान में मॉनसून की अक्षीय रेखा बीकानेर, अजमेर, निम्न दबाव के क्षेत्र, पेंडरा रोड, झारसुगुडा, पारादीप से होते हुए पूर्वी बंगाल की खाड़ी की ओर जा रही है।
अगले 24 घंटों के दौरान, पश्चिम मध्य प्रदेश, मध्य और पश्चिम उत्तर प्रदेश में मॉनसून व्यापक रूप से सक्रिय रहेगा।
इस बीच, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, कोंकण और गोवा, दिल्ली और मध्य महाराष्ट्र में सक्रिय मॉनसून की स्थिति देखी जाएगी।
वहीं सामान्य मानसून की स्थिति ओडिशा, बिहार, झारखंड, उत्तर आंतरिक कर्नाटक, तटीय कर्नाटक, केरल, पूर्वोत्तर राज्यों, उप हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और उत्तराखंड देखने को मिल सकती है।..........www.skymet.com

20 September 2017

ब्रांडेड अनाज पर जीएसटी को लेकर सरकार की सफाई

ब्रांडेड अनाज पर जीएसटी को लेकर कंफ्यूचन पर सरकार ने सफाई जारी की है। सरकार ने साफ कर दिया है कि नॉन-ब्रांडेड पैकेज्ड फूड जीएसटी के दायरे से बाहर होगा। यानि अगर कोई व्यापारी कारोबार में ब्रांड का सहारा नहीं लेता है तो उसे 5 फीसदी जीएसटी नहीं देनी होगी। हालांकि उसे एक्शनेबल क्लेम के तहत सरकार के सामने इसके लिए लिखित में सफाई देनी होगी। वहीं अगर ब्रांड किसी भी कानून के तहत रजिस्टर्ड है और एक्शनेबल क्लेम के दायरे में है तो वह जीएसटी के दायरे में आएगा। इसमें 15 मई तक रजिस्टर्ड सभी ब्रांड को शामिल किया गया है।

सोने की तेजी खत्म

दो दिनों की बैठक के बाद यूएस फेड ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया, लेकिन इस साल दरें बढ़ाने के मजबूत संकेत ​दिए हैं। ऐसे में सोने की तेजी खत्म हो गई है और इसका दाम पिछले तीन हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया है। डॉलर में आई रिकवरी से कॉमैक्स पर सोना 1300 डॉलर के नीचे आ गया है और इस साल की ऊंचाई से ये करीब 5 फीसदी का गोता लगा चुका है। ऐसे में माना जा रहा है कि आगे भी सोने में गिरावट गहरा सकती है। वहीं चांदी भी कमजोर है। अमेरिका में भंडार बढ़ने से कच्चे तेल में भी ऊपरी स्तर से दबाव है। हालांकि ब्रेंट लगातार 5 महीने की ऊंचाई पर बना हुआ है और नायमैक्स क्रूड भी 50 डॉलर के ऊपर है। एलएमई पर एल्युमिनियम का दाम पिछले 5 साल के ऊपरी स्तर पर चला गया है। चीन में उत्पादन घटने और एलएमई के गोदामों में भंडार गिरने से कीमतों को सपोर्ट मिला है। चीन में एल्युमिनियम का उत्पादन पिछले 16 महीने के निचले स्तर पर आ गया है। जबकि एलएमई के गोदामों में एल्युमिनियम का भंडार 2008 के स्तर पर आ गया है डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 0.5 लुढ़क गया है। एक डॉलर की कीमत 64.5 रुपये के पार है। रुपया करीब 2 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया है।

गुजरात में ग्वार सीड की बुवाई कम

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू सीजन में गुजरात में ग्वार सीड की बुवाई घटकर अभी तक केवल 1.98 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 2.21 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
चालू सीजन में किसानों ने ग्वार सीड के बजाए कपास, दलहन के साथ ही अन्य नगदी फसलों की बुवाई को तरजीह दी है, इसीलिए ग्वार सीड की बुवाई में कमी आई है। गुजरात में सामान्य ग्वार सीड की बुवाई 2.92 लाख हैक्टेयर में होती है।................   आर एस राणा

रबी में 97.5 लाख टन चना उत्पादन का लक्ष्य, अरहर का उत्पादन घटने की आशंका

आर एस राणा
नई दिल्ली। कृषि मंत्रालय ने रबी सीजन 2017-18 में चना उत्पादन का लक्ष्य 97.5 लाख टन का लाख टन का तय किया है जबकि चौथे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में चना का उत्पादन 93.3 लाख टन का हुआ था।
कृषि मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार फसल सीजन 2017-18 में मध्य प्रदेश में चना के उत्पादन का लक्ष्य 35 लाख टन का तय किया गया है, इसके अलावा महाराष्ट्र में 16.50 लाख टन, राजस्थान में उत्पादन का लक्ष्य 15 लाख टन, उत्तर प्रदेश में 7.15 लाख टन,
कर्नाटका में 6.82 लाख टन, आंध्रप्रदेश में 5 लाख टन, छत्तीसगढ़ में 3 लाख टन, गुजरात में 2.20 लाख टन, हरियाणा में 1.05 लाख टन और और झारखंड में 2.20 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य तय किया है।
जानकारों के अनुसार चालू खरीफ सीजन में देश के कई राज्यों में बारिश सामान्य से काफी कम हुई है, इसका असर चना की बुवाई पर भी पड़ेगा। कर्नाटका, महाराष्ट्र के साथ ही मध्य प्रदेश और राजस्थान के कई जिलों में बारिश सामान्य से कम हुई है।
कृषि मंत्रालय ने रबी सीजन 2017-18 में मूंग के उत्पादन का लक्ष्य 6.50 लाख टन का तय किया है, इसके अलावा रबी सीजन में मंत्रालय ने 7.60 लाख टन उड़द के उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। मंत्रालय ने चालू खरीफ में उड़द के उत्पादन का लक्ष्य 42.50 लाख टन का तय किया है। हालांकि चालू खरीफ में अरहर की बुवाई में पिछले साल की तुलना में 9 लाख हैक्टेयर से भी ज्यादा कमी आई है, ऐसे में अरहर का उत्पादन मंत्रालय द्वारा तय लक्ष्य से कम होने की आशंका है।...........   आर एस राणा

19 September 2017

सोने-चांदी में बढत

अमेरिका में फेडरल रिजर्व के बयान से पहले सोने-चांदी में बढत लौटी है। इंटरेस्ट रेट और बैलेंस शीट ट्रिमिंग को लेकर किसी तरह के सरप्राइज नहीं होने के उम्मीद में सोने में भरोसा लौटा है। बीते सेशन अमेरिकी राष्ट्रपति ने नॉर्थ कोरिया को तबाह करने की धमकी दी है। जिससे राजनैतिक संकट फिर से सिर उठाने लगा है। इस वजह से सोने में सेफ हेवेन अपील लौटती दिखी है। कच्चे तेल में भी बढत पर कारोबार जारी है। एपीआई के डाटा से क्रूड को सहारा मिला है। कच्चे तेल के स्टॉक में उम्मीद से कम बढ़त से सहारा मिला है।

20 सितंबर 2017 के लिए मॉनसून पूर्वानुमान

भारत के पश्चिमी तटों और मध्य भागों में मॉनसून व्यापक रूप में सक्रिय। इसके चलते कोंकण गोवा, तटीय कर्नाटक, केरल के कुछ हिस्सों, ओड़ीशा और दक्षिणी छत्तीसगढ़ के कुछ भागों में भारी बारिश हुई है। मध्य प्रदेश, दक्षिणी गुजरात, गंगीय पश्चिम बंगाल, मेघालय और मणिपुर में कई स्थानों पर जबकि उत्तर-पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में कुछ जगहों पर मॉनसून की सक्रियता के चलते अच्छी वर्षा दर्ज की गई।
पिछले 24 घंटों के दौरान हुई बारिश के आंकड़ों से ऐसा लगता है जैसे कई इलाकों की बारिश एक ही स्थान पर हो गई है। यहाँ मौसम केंद्र ने 374 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की। चंदबाली में 120 और महाबलेश्वर में 116 मिलीमीटर बारिश हुई है।
हालांकि देश भर में बारिश अभी भी सामान्य से पीछे है और 18 सितंबर तक कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से 6 प्रतिशत कम पर रहा। पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 3 फीसदी कम, उत्तर पश्चिम भारत में सामान्य से 10 प्रतिशत कम और मध्य भारत में सामान्य से 8 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। दक्षिण भारत में सामान्य बारिश हुई है।
मॉनसून की अक्षीय रेखा इस समय पठानकोट, चंडीगढ़, हरदोई, जमशेदपुर, बालासोर होते हुए बंगाल की खाड़ी में बनी हुई है।
इस परिप्रेक्ष्य में दक्षिण-पश्चिमी मध्य प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र में अगले 24 घंटों के दौरान मॉनसून की व्यापक सक्रियता रहेगी और इन भागों में भारी से अति भारी वर्षा देखने को मिल सकती है।
कोंकण गोवा, उत्तरी तटीय कर्नाटक, विदर्भ, मराठवाडा, तेलंगाना, मध्य प्रदेश के शेष भागों, छत्तीसगढ़, ओड़ीशा के कुछ हिस्सों, बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के मध्य तथा पूर्वी हिस्सों में भी मॉनसून सक्रिय रहेगा। इन भागों में हल्की से मध्यम वर्षा के आसार हैं।
तटीय ओड़ीशा, नागालैंड, मणिपुर, मिज़ोरम, त्रिपुरा, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, सिक्किम और उत्तराखंड के कुछ इलाकों में सामान्य मॉनसूनी बारिश देखने को मिल सकती है। आंतरिक कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भी कुछ स्थानों पर हल्की वर्षा होने की संभावना है।............www.skymet.com

ओएमएसएस के 10.71 लाख टन गेहूं की निविदा आमंत्रित

आर एस राणा
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत बेचने के लिए 10.71 लाख टन गेहूं की निविदा आमंत्रित की है। निविदा भरने का न्यूनतम भाव 1,790 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है, हालांकि उत्पादक राज्यों की मंडियों में गेहूं के भाव भारतीय खाद्य निगम के बिक्री भाव से नीचे होने के कारण एफसीआई से फ्लोर मिलें खरीद नहीं कर रही है।
एफसीआई ने हरियाणा से 3.71 लाख टन गेहूं बेचेने की निविदा मांगी हैं, इसके अलावा महाराष्ट्र से 2.99 लाख टन, पंजाब से 1,40 लाख टन, मध्य प्रदेश से एक लाख टन, तमिलनाडु से 40 हजार टन, राजस्थान से 20 हजार, कर्नाटका से 19,300 टन, दिल्ली से 16 हजार टन, केरल से 14 हजार टन, गुजरात से 11 हजार टन गेहूं बेचने के लिए निविदा मांगी हैं। ....................   आर एस राणा


पूसा बासमती 1,509 धान की आवक बढ़ी, भाव में मंदे की उम्मीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। प्रमुख उत्पादक राज्यों की मंडियों में पूसा 1,509 धान की दैनिक आवक बढ़कर करीब डेढ़ लाख बोरी की हो गई है तथा उत्पादक मंडियों में इसके भाव 2,200 से 2,400 रुपये प्रति क्विंटल क्वालिटीनुसार चल रहे है। पूसा बासमती 1,509 सेला चावल का भाव 5,700 रुपये प्रति क्विंटल है, इसीलिए धान के भाव उंचे हैं। आगे पूसा 1,509 धान के साथ ही परमल की दैनिक आवक भी बढ़ेगी, इसलिए इसके भाव में 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट आने का अनुमान है। परमल धान के भाव मंडियों में 1,400 से 1,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे।
पहली अक्टूबर से धान की सरकारी खरीद पंजाब के साथ ही हरियाणा में चालू हो जायेगी, तथा नवंबर में पूसा 1,121 बासमती धान की आवकों का दबाव बनेगा। हालांकि व्यापारियों के अनुसार चालू सीजन में इसके भाव तेज खुलने की संभावना है। पूसा 1,121 बासमती धान की खरीद भाव 2,400-2,500 रुपये प्रति क्विंटल से नीचे आने पर ही करनी चाहिए। ...................   आर एस राणा

18 September 2017

कच्चे तेल में तेजी जारी

कच्चे तेल में तेजी जारी है और ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट का दाम 55 डॉलर के ऊपर बना हुआ है। अगस्त में सऊदी अरब का क्रूड एक्सपोर्ट घट गया है। अमेरिका में शेल क्रूड का उत्पादन बढ़ने का अनुमान है। ऐसे में ऊपरी स्तर से दबाव भी शुरू हो गया है। डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की कमजोरी है और 1 डॉलर की कीमत 64 रुपये के ऊपर बना हुई है। अमेरिका में आज से फेडरल रिजर्व की अहम बैठक शुरू होगी और इससे पहले सोने की चमक फीकी पड़ गई है। कॉमैक्स पर सोने का दाम 1310 डॉलर के नीचे फिसल गया है जो पिछले 3 हफ्ते का निचला स्तर है। वहीं चांदी में भी तेज गिरावट आई है और इसका दाम 17.20 डॉलर के नीचे आ गया है।

17 September 2017

सोने की कीमतों पर दबाव

कल से शुरु होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक से पहले सोने में दबाव बढ़ गया है और इसका दाम 2 हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया है। कॉमैक्स पर सोना 1316 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। वहीं येन के मुकाबले डॉलर 7 हफ्ते की ऊंचाई पर है। इससे भी सोने की कीमतों पर दबाव है। सोने के साथ चांदी में भी गिरावट पर कारोबार हो रहा है। कच्चे तेल में तेजी जारी है और ब्रेंट का दाम 55 डॉलर के पार है।नायमैक्स पर क्रूड 50 डॉलर के पास कारोबार कर रहा है। अमेरिका में ऑयल रिग की संख्या घटने से कीमतों को सपोर्ट मिला है। वहीं चीन में कॉपर 1 महीने के निचले स्तर पर कारोबार कर रहा है। पिछले हफ्ते चीन में खराब आंकड़ों से कॉपर पर दबाव बढ़ गया है। एलएमई के गोदामों में कॉपर के बढ़ते भंडार से भी इसकी कीमतें गिरी हैं। एलएमई पर ये हल्की गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपये में आज हल्की मजबूती आई है। 1 डॉलर की कीमत 64 रुपये के पास आ गई है।

16 September 2017

मक्का की बुवाई में कमी, भाव में आगे और नरमी की उम्मीद

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में मक्का की बुवाई में कमी आई है, इसके बावजूद भी मक्का की कीमतों में दैनिक आवक बढ़ने पर 25 से 30 रुपये प्रति क्विंटल की नरमी ही आने का अनुमान है। ज्वार की बुवाई भी चालू खरीफ में कम हुई है जबकि बाजरा की बुवाई में हल्की बढ़ोतरी हुई है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में मक्का की बुवाई घटकर 79.68 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 83.03 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। मक्का की बुवाई जहां मध्य प्रदेश में बढ़ी है वहीं उत्तर प्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र में घटी है।
ज्वार की बुवाई चालू खरीफ में राजस्थान के साथ ही महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कम हुई है। ज्वार की बुवाई चालू खरीफ में घटकर अभी तक केवल 18.12 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल ज्वार की बुवाई अभी तक 19.54 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
बाजरा की बुवाई चालू खरीफ में बढ़कर 71.46 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 70.35 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। प्रमुख उत्पादक राज्य राजस्थान में बाजरा की बुवाई बढ़कर 43.66 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई राजस्थान में केवल 39.33 लाख हैक्टेयर में ही हुई थी। ......................   आर एस राणा

निर्यात खुलने से अरहर, मूंग और उड़द की कीमतों में तेजी

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा अरहर, मूंग और उड़द का निर्यात खोलने से शनिवार को उत्पादक मंडियों में इनकी कीमतों में 200 से 500 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी दर्ज की गई।  दिल्ली के नया बाजार में मूंग के भाव बढ़कर 4,700 से 5,200 रुपये, उड़द के 4,800 से 5,500 रुपये और अरहर के भाव 4,400 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
जानकारों के अनुसार अरहर के साथ ही उड़द और मूंग के निर्यात की अच्छी संभावनाएं है, इसलिए आगे इनकी कीमतों में और भी तेजी आने का अनुमान है। आयातित लेमन के भाव मुंबई में बढ़कर 4,100 रुपये और उड़द एफएक्यू के भाव 4,900 रुपये तथा एसक्यू के भाव 6,300 रुपये प्रति क्विंटल हो गए।
राजस्थान में राज्य सरकार पहली अक्टूबर से दलहनी फसलों मूंग और उड़द की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर शुरु करेगी। राज्य सरकार ने खरीद के लिए 76 केंद्रों की स्थापना की है। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017-18 के लिए मूंग का एमएसपी 5,575 रुपये और उड़द का 5,400 रुपये प्रति क्विंटल (बोनस सहित) तय किया हुआ है जबकि मूंग और उड़द के भाव उत्पादक मंडियों में अभी भी एमएसपी से नीचे बने हुए हैं।.............   आर एस राणा

एग्री कमोडिटी दैनिक न्यूज के लिए सुनहरा मौका

खरीफ फसलें सोयाबीन, मूंगफली, केस्टर सीड, ग्वार सीड, धान, बाजरा, मक्का, मूंग, उड़द, अरहर तथा कपास आदि की नई फसल की आवक उत्पादक मंडियों में अक्टूबर में चालू हो जायेगी, तथा इस बार कैसा रहगा जिंसों का बाजार, आगे किस-किस कमोडिटी में निवेश करने से होगा फायदा, या फिर किस कमोडिटी में बनेगी बड़ी तेजी, आयात और निर्यात के साथ ही केंद्र सरकार की नीतियां कैसी रहेगी, इस सब की जानकारी के लिए हमसे जुड़े। 
एग्री कमोडिटी में दैनिक न्यूज ई-मेल के माध्यम से हिंदी में मिलेंगी। इसमें आपको हर रोज एग्री जिंसों दलहन, तिलहन, ग्वार सीड, चीनी, गेहूं, मोटे अनाज, चावल तथा मसालों की तेजी-मंदी की जानकारी, निर्यात-आयात की खबरों के अलावा सरकार की नीतियां, उत्पादन तथा पैदावार की जानकारी दी जायेगी। प्रमुख उत्पादक मंडियों के एग्री जिसों के भाव शाम 5 बचे तक मिलेंगे। यह स्कीम केवल 15 अक्टूबर 2017 तक है, उसके बाद सदस्यता शुल्क बढ़ेगा।




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15 September 2017

16 सितम्बर 2017 का मॉनसून

जम्मू और कश्मीर पर एक पश्चिमी विक्षोभ पूर्वोत्तर बना हुआ है।
मानसून की अक्षीय रेखा का पश्चिमी छोर हिमालय के तराई इलाकों के करीब चल रहा है, जबकि पूर्वी छोर राँची, दिघा और बंगाल की उत्तरी खाड़ी की तरफ जा रहा है।
एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र पूर्व-मध्य अरब सागर और इससे सटे हुए कर्नाटक तट पर देखा जा सकता है।
उत्तरी बांग्लादेश पर एक और चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र बना हुआ है।
एक तीसरा चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र उत्तर बंगाल की खाड़ी और गंगीय पश्चिम बंगाल पर बना हुआ है।
एक चौथा चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र दक्षिण-पूर्व राजस्थान और आस-पास मध्य प्रदेश पर देखा जा सकता है। एक ट्रफ़ रेखा इस सिस्टम से गुजरात होते हुए पूर्वोत्तर अरब सागर तक जा रही है।
मॉनसून कोंकण और गोवा और तटीय कर्नाटक पर व्यापक रूप से सक्रिय रहा।
वहीं दक्षिण गुजरात, विदर्भ, मध्य प्रदेश, दक्षिण छत्तीसगढ़, उत्तरी तटीय उड़ीसा, तेलंगाना, केरल और अंडमान निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में मॉनसून सक्रिय रहा।
सामान्य मॉनसून की स्थिति आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा, तटीय आंध्र प्रदेश, शेष छत्तीसगढ़, झारखंड और गंगीय पश्चिम बंगाल पर देखी गयी।
मॉनसून पूर्वोत्तर राज्य, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और जम्मू और कश्मीर पर कमजोर रहा।
मॉनसून दक्षिण गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल के तटीय और उत्तर के हिस्सों पर सक्रिय रहेगा।
वहीं सामान्य मॉनसून की स्थिति रायलसीमा, तेलंगाना, तटीय आंध्र प्रदेश, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ हिस्सों में देखी जा सकती है।
आंतरिक तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तराखंड में मॉनसून कमजोर रहेगा।......www.skymet.com

सोयाबीन का उत्पादन 16 फीसदी कम होने की आशंका-एसईए

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में बुवाई में आई कमी के साथ बारिश सामान्य से कम होने के कारण सोयाबीन के उत्पादन में 16 फीसदी और मूंगफली के उत्पादन में 2.75 फीसदी की कमी आने की आशंका है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन का उत्पादन घटकर 89 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 105 लाख टन का हुआ था। इसी तरह से मूंगफली का उत्पादन चालू खरीफ में घटकर 51 लाख टन होने की संभावना है जबकि फसल सीजन 2016-17 में मूंगफली का उत्पादन 73.75 लाख टन का हुआ था। सनफ्लावर सीड का उत्पादन भी चालू खरीफ में घटकर 0.80 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इसका उत्पादन 1.45 लाख टन का हुआ था। शीसम सीड का उत्पादन पिछले साल के 4.15 लाख टन से घटकर 3.50 लाख टन ही होने का अनुमान है। एसईए के अनुसार खरीफ में तिलहनों का कुल उत्पादन 20.05 फीसदी घटकर 144.30 लाख टन ही होने का अनुमान है जबकि पिछले साल इनकी पैदावार 164.35 लाख टन की हुई थी।
सोयाबीन के उत्पादन तो कमी आने का अनुमान है लेकिन पिछले साल का बकाया स्टॉक ज्यादा बचा हुआ है। ऐसे में कुल उपलब्धता पिछले साल के लगभग बराबर ही बैठेगी। इसी तरह से मूंगफली का बकाया स्टॉक ज्यादा होने से इसकी कुल उपलब्धता भी उत्पादक राज्यों में ज्यादा ही है। उत्पादक मंडियों में नई सोयाबीन की आवक चालू हो गई है, तथा अक्टूबर में आवकों का दबाव बनने पर इसके भाव में मंदा आने की उम्मीद है। मूंगफली के भाव में भी नई फसल की आवक बढ़ने पर मंदा आने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई घटकर 105.76 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 114.72 लाख हैक्टेयर में हुई थी। इसी तरह से मूंगफली की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 41.36 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल इस समय तक इसकी बुवाई 46.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। सनफ्लावर की बुवाई चालू खरीफ में पिछले साल के 1.59 लाख हैक्टेयर से घटकर 1.37 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि शीसम सीड की बुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 13.78 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इसकी बुवाई 15.70 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। ...........   आर एस राणा

खरीफ में धान, दलहन व तिलहन की बुवाई कम, कपास और गन्ने की ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। खरीफ में कई राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण खरीफ फसलों खासकर के धान, दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में कमी आई है, वहीं कपास के साथ ही गन्ने की बुवाई ज्यादा हुई है। बुवाई में आई कमी के साथ ही बारिश जुलाई से अगस्त के दौरान सामान्य से कम होने और कई राज्यों में बाढ़ जैसी स्थिति बनने से चालू खरीफ में जहां दलहन की पैदावार कम होने की आशंका है, वहीं तिलहनों व मोटे अनाजों खासकर के मक्का व ज्वार आदि का उत्पादन भी कम रहेगा। हालांकि बुवाई में हुई बढ़ोतरी से कपास और गन्ने की पैदावार ज्यादा होने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की कुल बुवाई घटकर अभी तक केवल 1,049.42 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,057.15 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू खरीफ में घटकर 374 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रौपाई 379.12 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई घटकर 140.38 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक दलहन की बुवाई 145.55 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों में अरहर की बुवाई में करीब 9 लाख हैक्टेयर में कमी आकर कुल बुवाई अभी तक 43 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि मूंग की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में 3 लाख हैक्टेयर से ज्यादा घटी है। उड़द की बुवाई पिछले साल की तुलना में सात लाख हैक्टेयर से ज्यादा हुई है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 172.02 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 188.63 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनों में सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई भी पिछड़ रही है। सोयाबीन की बुुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 105.76 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 114.72 लाख हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी थी। मूंगफली की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर 41.36 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 46.78 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। केस्टर सीड की बुवाई भी चालू खरीफ में पिछड़ रही है। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई घटकर 7.90 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 8.24 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में पिछले साल की तुलना में घटकर अभी तक केवल 184.50 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 188.40 लाख हैक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में जहां बाजरा की बुवाई में हल्की बढ़ोतरी हुई है वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई में कमी आई है।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 121.51 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 102.23 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 49.95 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.64 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।................   आर एस राणा

14 September 2017

उत्तर कोरिया को लेकर फिर से तनाव बढ़ने से सोना में चमक

उत्तर कोरिया को लेकर फिर से तनाव बढ़ने से कमोडिटी बाजार का समीकरण फिर से बिगड़ गया है और कच्चे तेल में कल जोरदार तेजी आई थी और नायमैक्स पर क्रूड का दाम 50 डॉलर के ऊपर चला गया था। हालांकि आज ऊपरी स्तर से कुछ दबाव है। वहीं ब्रेंट में भी 5 महीने के ऊपरी स्तर से हल्की गिरावट आई है। हालांकि इस हफ्ते ब्रेंट क्रूड 3 फीसदी और नायमैक्स क्रूड का दाम करीब 5 फीसदी बढ़ चुका है। वहीं ऐसे माहौल में सोना फिर से चमक गया है और कॉमैक्स पर इसका दाम 1330 डॉलर के स्तर पर चला गया है। वहीं चांदी में भी तेजी आई है। लेकिन लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेस मेटल में सपाट कारोबार हो रहा है। चीन में मांग घटने के अनुमान से कल कॉपर का दाम 1 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया था।

13 September 2017

कच्चे तेल में ऊपरी स्तर से दबाव

कल की जोरदार तेजी के बाद कच्चे तेल में ऊपरी स्तर से दबाव दिख रहा है। इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी ने ओपेक का उत्पादन घटने और अमेरिका और यूरोप में क्रूड की मांग बढ़ने का अनुमान जताई है। ऐसे में ब्रेंट का दाम 55 डॉलर के ऊपर का स्तर छू लिया। अमेरिका में भंडार बढ़ने से ऊपरी स्तर से अब हल्का दबाव है। वहीं दबाव के बावजूद नायमैक्स क्रूड  49 डॉलर के ऊपर है। अमेरिका में गैसोलीन के भंडार में रिकॉर्ड साप्ताहिक गिरावट दर्ज हुई है। सोने में भी आज दबाव है और ग्लोबल मार्केट में इसका दाम पिछले दो हफ्ते के निचले स्तर पर आ गया है। कॉमैक्स पर फिलहाल सोना 1320 डॉलर के पास कारोबार कर रहा है। चांदी में भी दबाव है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर बेस मेटल में आज रिकवरी आई है और चीन में लेड का दाम उछल गया है। डॉलर में रिकवरी से रुपये पर दबाव बढ़ गया है और 1 डॉलर की कीमत 64.10 रुपये के पार चली गई है।

मॉनसून की बदल रही चाल; भारत में बढ़ रहा है सूखे और बाढ़ का संकट

दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पर भारत की खरीफ फसलें ही नहीं हैं बल्कि पानी की अन्य जरूरतें भी मॉनसून वर्षा से काफी हद तक तक पूरी होती हैं। मॉनसून का भारत के लिए बहुत अधिक महत्व है। यही वजह है कि किसान से लेकर आम आदमी और सरकार तक की नज़रें मॉनसून पर टिकी रहती हैं। मॉनसून के प्रदर्शन को ध्यान में रखकर सरकार की कई नीतियाँ तैयार की जाती हैं।
चार महीनों का मॉनसून का सफर अपने आखिरी चरण में पहुँच गया है और इसकी विदाई राजस्थान के पश्चिमी भागों से कभी भी शुरू हो सकती है। वर्ष 2017 में स्काइमेट ने सामान्य से 5 फीसदी कम 95 प्रतिशत यानि मॉनसूनी बारिश की संभावना जताई थी और अब तक देश में जितनी वर्षा हुई है वह स्काइमेट को 100 प्रतिशत सही साबित करती है।
मॉनसून की बदलती चाल चिंता का विषय है क्योंकि मॉनसून के परंपरागत प्रदर्शन में बदलाव ना सिर्फ कृषि को प्रभावित कर रहा है बल्कि परिस्थितिकी पर भी इसका असर देखने को मिलेगा। बदल रही जलवायु किसानों को गंभीर रूप में प्रभावित कर सकती है।
वर्षा 2017 में अब तक हुई बारिश के आंकड़े बताते हैं कि कहीं भीषण बाढ़ की विभीषिका रही तो कहीं सूखे जैसे हालात से बंजर होती धरती है। ऐसा नहीं है कि यह स्थिति इस बार अचानक आई है। लेकिन सच यह भी है कि हर वर्ष सूखे और बाढ़ वाले इलाकों का दायरा बढ़ता जा रहा है। नीचे दिए गए आंकड़ों में यह अंतर समझा जा सकता है, जो 1 जून से 11 सितंबर तक हुई बारिश पर आधारित हैं।
Monsoon rains in India in 2017
दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने 2017 में असम, बिहार, उत्तर-पूर्वी उत्तर प्रदेश, राजस्थान के कुछ इलाकों और गुजरात में बाढ़ ने तबाही मचाई। दक्षिणी छत्तीसगढ़ और ओड़ीशा के कुछ भागों में भी भारी वर्षा और बाढ़ का संकट रहा। पश्चिमी राजस्थान और कच्छ में बारिश कम होती थी। इन भागों में मॉनसूनी बारिश बढ़ रही है और सामान्य से अधिक बारिश होने लगी है।
दूसरी ओर हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, विदर्भ और तटीय कर्नाटक में कई जगह सूखे जैसे हालात हैं। यही नहीं जिन राज्यों में सामान्य से अधिक बारिश हुई है उनमें भी वितरण संतुलित नहीं रहा।
अगर यही क्रम आगे भी बना रहता है तो इस पर गंभीरता से चिंतन करना होगा और कृषि के लिए रणनीति बदलनी होगी। यानि जब मॉनसून हमारे अनुकूल नहीं चल रहा है तो क्यों ना हम उसके अनुकूल चलें, इस पर सोचने की ज़रूरत है।..........www.skymet.com
 

सोयाबीन का बकाया स्टॉक 20 लाख टन से ज्यादा बचने का अनुमान

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में सोयाबीन का बकाया स्टॉक 20 लाख टन से ज्यादा बचने का अनुमान है जबकि पिछले साल अक्टूबर के शुरु में बकाया स्टॉक 4.41 लाख टन का ही बचा हुआ था। चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई कम हुई है, साथ ही उत्पादक राज्यों में मानसूनी बारिश सामान्य से कम होने के कारण उत्पादन तो कम होने का अनुमान है लेकिन बकाया स्टॉक को मिलाकर कुल उपलब्धता पिछले साल के लगभग बराबर ही होने का अनुमान है। उत्पादक मंडियों में नई सोयाबीन की आवक चालू हो गई है, तथा अगले महीने दैनिक आवक और बढ़ेगी, जिससे मौजूदा भाव 50 से 100 रुपये का मंदा आने का अनुमान है।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (सोपा) के अनुसार उत्पादक राज्यों में अगस्त के आखिर में बकाया स्टॉक करीब 24.91 लाख टन का बचा हुआ है, जबकि सितंबर में औसत खपत करीब चार से पांच लाख टन ही होने का अनुमान, ऐसे में बकाया स्टॉक 20 लाख टन के करीब बचेगा, जबकि पिछले साल नई फसल के बकाया स्टॉक केवल 4.41 लाख टन का ही बचा हुआ था।
सोपा के अनुसार चालू खरीफ में सोयाबीन की बुवाई घटकर 105.26 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 114.66 लाख हैक्टेयर में हुई थी। चालू खरीफ उत्पादक राज्यों में जुलाई से अगस्त के दौरान बारिश सामान्य से काफी कम हुई है जिससे प्रति हैक्टेयर उत्पादकता में कमी आने की आशंका है। ऐसे में चालू खरीफ में उत्पादन पिछले साल के 114.91 लाख टन से कम होने का अनुमान है लेकिन बकाया स्टॉक को मिलाकर कुल उपलब्धता पिछले साल के लगभग बराबर ही बैठेगी।
सोयाबीन की नई फसल की आवक मध्य प्रदेश की मंडियों में चालू हो गई है तथा नई फसल के भाव 2,400 से 2,700 रुपये और पुरानी सोयाबीन के भाव 2,700 से 3,000 रुपये प्रति क्विंटल है। नई सोयाबीन में नमी की मात्रा ज्यादा है, अक्टूबर में नई फसल की आवक तो बढ़ेगी ही, साथ ही सूखे मालों की आवक बढ़ेगी, जिससे सोयाबीन की कीमतों में नरमी आने का अनुमान है।
सोपा के अनुसार फसल सीजन 2016-17 में अक्टूबर-16 से अगस्त-17 के दौरान 17.34 लाख टन सोया डीओसी का निर्यात हुआ है। इस दौरान घरेलू बाजार में डीओसी की खपत करीब 41.25 लाख टन का हुई है। ...........  आर एस राणा

12 September 2017

अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन अनुमान घटा

अमेरिकी एनर्जी डिपार्टमेंट ने अमेरिका में कच्चे तेल का उत्पादन अनुमान घटा दिया है। ईआईए ने कहा है कि हार्वे तूफान की वजह से इस साल औसत रोजाना 92.5 लाख बैरल ही क्रूड का उत्पादन संभव है, जबकि पिछले महीने एजेंसी ने 93.5 लाख बैरल उत्पादन रहने का अनुमान दिया था। ईआईए ने 2018 के लिए भी क्रूड उत्पादन अनुमान में कटौती किया है। कल क्रूड की कीमतों में तेजी आई थी और ब्रेंट का दाम 54 डॉलर और डब्ल्यूटीआई क्रूड 48 डॉलर के पार चले गए थे। हालांकि आज डॉलर में रिकवरी से ऊपरी स्तर से दबाव दिख रहा है।
सोने में आज बेहद छोटे दायरे में कारोबार हो रहा है। इसका दाम 1330 डॉलर के पास है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर में मजबूती आई है और इसका दाम करीब 0.25 फीसदी बढ़ गया है। डॉलर के मुकाबले रुपये में हल्की रिकवरी है।

यूपी, एमएपी, हरियाणा, कर्नाटका में सूखे जैसे हालात

आर एस राणा
नई दिल्ली। मानसून सीजन समाप्ति की ओर है जबकि देश के 22 फीसदी इलाकों में चालू खरीफ में मानसूनी बारिश सामान्य से काफी कम हुई है। देश के छह-सात जिलों में सूखे जैसे हालात होने से स्थिति चिंताजनक है। इन राज्यों में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है, जिसका असर खरीफ के साथ ही रबी फसलों पर भी पड़ने की आशंका है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हरियाणा, विदर्भ, कर्नाटका और केरल में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। उत्तर प्रदेश में हालात ज्यादा चिंताजनक है, उत्तर प्रदेश के करीब 30 फीसदी इलाकों में तो 50 फीसदी से भी कम बारिश हुई है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के करीब 75 फीसदी इलाकों में तो सूखे जैसे हालात हैं। .....................   आर एस राणा

अगस्त में वनस्पति तेलों का आयात 8 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। अगस्त महीने में वनस्पति तेलों के आयात में 8 फीसदी की बढ़ोतरी होकर कुल आयात 1,361,272 टन का हुआ है जबकि पिछले साल अगस्त महीने में इनका आयात 1,261,827 टन का ही हुआ था। अगस्त महीने में खाद्य तेलों का आयात 1,336,925 टन का हुआ है जबकि अखाद्य तेलों का आयात 24,347 टन का हुआ है।
साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन आफ इंडिया (एसईए) के अनुसार चालू तेल वर्ष 2016-17 ( नवंबर-16 से अक्टूबर-17) के पहले 10 महीनों नवंबर-16 से अगस्त-17 के दौरान वनस्पति तेलों का आयात 5 फीसदी बढ़कर कुल आयात 12,749,568 टन का हो चुका है जबकि पिछले तेल वर्ष 2015-16 की समान अवधि में इनका आयात 12,165,605 टन का हुआ था। चालू तेल वर्ष के पहले दस महीनों में खाद्य तेलों का आयात 12,438,020 टन का हुआ है, जबकि अखाद्य तेलों का आयात 3,11,548 टन का हुआ है।
भारतीय बंदरगाह पर आरबीडी पामोलीन के औसत भाव अगस्त महीने में 684 डॉलर प्रति टन रहे, जबकि जुलाई में इसका औसत भाव 683 डॉलर प्रति टन था। क्रुड पॉम तेल के भाव अगस्त में घटकर भारतीय बंदरगाह पर 670 डॉलर प्रति टन रह गए, जबकि जुलाई में इसका भाव 681 डॉलर प्रति टन था। क्रुड सोयाबीन के भाव अगस्त में बढ़कर भारतीय बंदरगाह पर 813 डॉलर प्रति टन हो गए, जबकि जुलाई में इसका औसत भाव 802 डॉलर प्रति टन था। ..............   आर एस राणा

11 September 2017

डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी

डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी आई है और 1 डॉलर की कीमत 64 रुपये के स्तर पर चली गई है। ग्लोबल मार्केट में सोने में गिरावट बढ़ गई है। कॉमैक्स पर सोने का दाम 1325 डॉलर के भी नीचे फिसल चुका है। डॉलर में रिकवरी और शेयर बाजारों में तेजी से सोने में से पैसा निकलने लगा है। इस साल के रिकॉर्ड स्तर से सोना करीब 30 डॉलर का गोता लगा चुका है। वहीं चांदी में भी बिकवाली हावी है। इसका दाम 18 डॉलर के काफी नीचे आ गया है। अमेरिका में भंडारण रिपोर्ट से पहले कच्चा तेल भी कमजोर पड़ गया है। ब्रेंट का दाम 54 डॉलर के नीचे आ गया है। डब्ल्यूटीआई क्रूड में भी कमजोर कारोबार हो रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर मेटल में तेजी जारी है और कॉपर समेत सभी मेटल बढ़त के साथ कारोबार कर रहे हैं।

12 सितंबर 2017 के लिए मॉनसून पूर्वानुमान

पिछले 24 घंटों के दौरान, दक्षिण पश्चिम मानसून केरल, आंतरिक कर्नाटक, कोंकण गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय और त्रिपुरा के कुछ हिस्सों में सक्रिय प्रदर्शन देखने को मिला।
वही तमिलनाडू, तटीय आंध्र प्रदेश, ओडिशा और बाकी बचे पूर्वोत्तर राज्यों में हल्की बारिश दर्ज की गई। जबकि गुजरात, पूर्वी राजस्थान, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार और झारखंड में बारिश का कमजोर प्रदर्शन दर्ज किया गया।
पिछले 24 घंटों में अगरतला में 125 मिमी बारिश दर्ज की गई वहीं, कुन्नूर में 115 मिमी और करिपुर में 58 मिमी वर्षा रेकॉर्ड की गई।
10 सितंबर तक, देश भर के बारिश के आंकड़े में 6% की कमी बनी हुई है। जहां तक क्षेत्रीय वितरण का संबंध है, उत्तर पश्चिमी, मध्य और दक्षिण भारत सहित सभी क्षेत्रों में 7, 9, और 2% की कमी है।
वर्तमान में, मानसून की अक्षीय रेखा हिमालय के तराई वाले क्षेत्रों से होकर गुजर रही है।
अगले 24 घंटों के दौरान दक्षिण पश्चिम मॉनसून आंतरिक तमिलनाडू, केरल, उत्तरी आंतरिक और कर्नाटक के तटीय हिस्सों, कोंकण गोवा, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा, विदर्भ, दक्षिणी मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पश्चिमी असम के कुछ हिस्सों, मेघालय और त्रिपुरा में सक्रिय रहेगा।
वही दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, तटीय आंध्र प्रदेश, ओड़ीशा के कुछ हिस्सों, दक्षिणी गुजरात, पंजाब के कुछ हिस्सों, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की से मध्यम बारिश होने सकती है।
जबकि गुजरात के बाकी बचे हिस्सों, जम्मू कश्मीर, बिहार, झारखंड और पूर्वी राजस्थान के कुछ हिस्सों में भी बारिश हो सकती है।
देश के बाकी बचे हिस्सों में मौसम शुष्क बना रहेगा।...........www.skymet.com


10 September 2017

कच्चे तेल में तेजी आई

सप्लाई में दिक्कत की आशंका से कच्चे तेल में तेजी आई है और इसका दाम करीब 0.5 फीसदी बढ़ गया है। फिलहाल ब्रेंट में 54 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। जबकि नायमैक्स पर क्रूड का दाम 48 डॉलर के पास है। ग्लोबल मार्केट में नैचुरल गैस का दाम करीब 1.5 फीसदी उछल गया है डॉलर में रिकवरी से रुपये पर दबाव है और रुपया हल्की कमजोरी के साथ कारोबार कर रहा है। ग्लोबल मार्केट में सोने का दाम पिछले 1 साल के ऊपरी स्तर से लुढ़क गया है। फिलहाल ये करीब 8 डॉलर की गिरावट के साथ 1337 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है। इस साल के ऊपरी स्तर से इसका दाम करीब 15 डॉलर टूट चुका है। डॉलर में हल्की रिकवरी आई है। ऐसे में चांदी पर भी दबाव बढ़ गया है और कॉमैक्स पर चांदी करीब 0.5 फीसदी की गिरावट के साथ 18 डॉलर के नीचे कारोबार कर रही है।

08 September 2017

9 सितंबर 2017 के लिए मॉनसून पूर्वानुमान

पिछले 24 घंटों के दौरान दक्षिण पश्चिम मॉनसून दक्षिण कोकण और गोवा, दक्षिण मध्य महाराष्ट्र, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक और लक्षद्वीप पर व्यापक रूप से सक्रिय रहा। जबकि सक्रिय मॉनसून की स्थिति केरल, रायलसीमा, आंतरिक तमिलनाडु, बिहार के कुछ हिस्सों, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और असम पर देखी गयी। वहीं मध्य महाराष्ट्र, विदर्भ, दक्षिण पूर्व मध्य प्रदेश, आंतरिक उड़ीसा, कोंकण और गोवा के बाकी हिस्सों, तटीय कर्नाटक, उत्तर राजस्थान, पंजाब के कुछ हिस्से, जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के शेष हिस्सों में मॉनसून सामान्य रहा।
पिछले 24 घंटों में थिरुवनंथपुरम में 86 मिमी बारिश दर्ज की गयी वहीं जलपाईगुड़ी में 83 मिमी और गुलबर्गा में 82 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गयी।
7 सितंबर तक देश भर के बारिश के आंकड़े में 5% की कमी आ गयी है। जहां तक क्षेत्रीय वितरण का संबंध है उत्तर-पश्चिम, मध्य और दक्षिण भारत में 5%, 9% और 4% की कमी देखी जा सकती है।
वर्तमान में मॉनसून की अक्षीय रेखा श्रीगंगानगर, हिसार, दिल्ली, हरदोई, गोरखपुर, मुजफ्फरपुर और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल से होते हुए पूर्वी असम की तरफ जा रही है।
अगले 24 घंटों के दौरान, कोंकण और गोवा के कुछ हिस्से, मध्य महाराष्ट्र, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम पर मध्यम से भारी वर्षा की संभावना है। वहीं आंतरिक कर्नाटक, केरल के हिस्से, आंतरिक तमिलनाडु, असम, मेघालय और अरुणाचल प्रदेश में मॉनसून के सक्रिय रहने की संभावना है। इस बीच, तेलंगाना, मराठवाड़ा, विदर्भ, दक्षिण मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक उड़ीसा, पूर्वोत्तर राज्यों और उत्तराखंड के बाकी हिस्सों में सामान्य मॉनसून की उम्मीद है।
भारत के प्रमुख शहरों की बात करें तो बेंगलुरु, हैदराबाद और मुंबई में हल्की वर्षा हो सकती है। चेन्नई, कोलकाता और दिल्ली में शुष्क मौसम की स्थिति देखी जाएगी।.........www.skymet.com

गेहूं पर आयात शुल्क अक्टूबर में बढ़ा सकती है सरकार

आर एस राणा
नई दिल्ली। केंद्र सरकार अक्टूबर में गेहूं के आयात शुल्क में बढ़ोतरी कर सकती है। चालू फसल सीजन में गेहूं का बंपर उत्पादन होने के साथ ही आयात ज्यादा होने के कारण गेहूं के भाव में अपेक्षित तेजी नहीं बन पाई है। दिल्ली की लारेंस रोड़ पर गेहूं के भाव 1,770 से 1,775 प्रति क्विंटल है। अक्टूबर में गेहूं की बुवाई चालू हो जायेगी, ऐसे में गेहूं की बुवाई में बढ़ोतरी तभी हो सकती है जब केंद्र सरकार आयात शुल्क में बढ़ोतरी करें, जिससे आयात बंद हो सके।
केंद्र सरकार गेहूं के आयात शुल्क में बढ़ोतरी करती है, तो भी घरेलू बाजार में गेहूं के मौजूदा भाव में 100 से 125 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी तो आ सकती है लेकिन बड़ी तेजी की संभावना नहीं है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत गेहूं का बिक्री भाव उत्पादक राज्यों पंजाब, हरियाणा और मध्य प्रदेश से 1,790 रुपये प्रति क्विंटल है, अतः आयात शुल्क में बढ़ोतरी करने से ओएमएसएस के तहत गेहूं की बिक्री बढ़ जायेगी।
सूत्रों के अनुसार इस समय गेहूं के आयात शुल्क 10 फीसदी है, अक्टूबर में आयात शुल्क को बढ़ाकर 25 फीसदी किए जाने की योजना है। विश्व बाजार में गेहूं का भाव कम होने के कारण 10 फीसदी आयात शुल्क के बावजूद भी आयातित गेहूं सस्ता है इसीलिए लगातार आयात सौदे हो रहे हैं। व्यापारियों के अनुसार सितंबर-अक्टूबर शिपमेंट के करीब 7.5 लाख टन गेहूं के आयात सौदे हो चुके हैं तथा आयातित गेहूं दक्षिण भारत में 1,670 रुपये प्रति क्विंटल है। आयातित लाल गेहूं है इसलिए फ्लोर मिलों को इसकी पिसाई मिक्सिंग करके करनी पड़ रही हैं।
उत्पादक राज्यों मध्य प्रदेश के साथ ही राजस्थान और उत्तर प्रदेश में गेहूं का स्टॉक ज्यादा होने के कारण भाव काफी नीचे हैं, यहीं कारण है कि फ्लोर मिलें ओएमएसएस के तहत गेहूं की खरीद नहीं कर रही हैं।..........   आर एस राणा

धान, दलहन और तिलहन के साथ मोटे अनाजों की बुवाई कम, कपास की ज्यादा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू खरीफ में धान, के साथ ही दलहन, तिलहन और मोटे अनाजों की बुवाई में कमी आई है जबकि कपास की बुवाई बढ़ी है। जुलाई से अगस्त के दौरान देशभर में सामान्य से कम बारिश होने के कारण खरीफ फसलों की कुल बुवाई पिछले साल की तुलना में घटी है। कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में फसलों की कुल बुवाई घटकर अभी तक केवल 1,041.17 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में 1,049.87 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी। खरीफ की प्रमुख फसल धान की रौपाई चालू खरीफ में घटकर 371.46 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी रौपाई 376.89 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।
मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में दलहन की बुवाई घटकर 139.17 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक दलहन की बुवाई 144.84 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। दलहनी फसलों में अरहर की बुवाई में करीब 10 लाख हैक्टेयर में कमी आकर कुल बुवाई अभी तक 42.81 लाख हैक्टेयर में ही हुई है, जबकि मूंग की बुवाई भी पिछले साल की तुलना में घटी है। उड़द की बुवाई पिछले साल की तुलना में सात लाख हैक्टेयर से ज्यादा बढ़ी है।
तिलहनों की बुवाई चालू खरीफ में घटकर 169.20 लाख हैक्टेयर में ही पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में तिलहनों की बुवाई 187.16 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। तिलहनों में सोयाबीन के साथ ही मूंगफली की बुवाई भी पिछड़ रही है। सोयाबीन की बुुवाई चालू खरीफ में अभी तक केवल 105.26 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल इस समय तक 114.66 लाख हैक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी थी। मूंगफली की बुवाई भी चालू खरीफ में घटकर 40.78 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 46.46 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी। केस्टर सीड की बुवाई भी चालू खरीफ में पिछड़ रही है। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई घटकर 6.86 लाख हैक्टेयर में ही हुई है जबकि पिछले साल इस समय तक 7.51 लाख हैक्टेयर में बुवाई हो चुकी थी।
मोटे अनाजों की बुवाई चालू रबी में पिछले साल की तुलना में घटकर अभी तक केवल 183.43 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 186.06 लाख हैक्टेयर में मोटे अनाजों की बुवाई हो चुकी थी। मोटे अनाजों में जहां बाजरा की बुवाई में बढ़ोतरी हुई है वहीं मक्का के साथ ही ज्वार की बुवाई पिछे चल रही है।
कपास की बुवाई चालू रबी में बढ़कर 120.98 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक केवल 101.72 लाख हैक्टेयर में ही कपास की बुवाई हो पाई थी। गन्ने की बुवाई भी चालू सीजन में बढ़कर 49.88 लाख हैक्टेयर में हो चुकी है जबकि पिछले साल इस समय तक 45.64 लाख हैक्टेयर में ही गन्ने की बुवाई हो पाई थी।.................     आर एस राणा

सोयाबीन पर कम बारिश की मार

मध्यप्रदेश में किसानों की चिंता बढ़ सकती है। इस साल राज्य में बेहद कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में इस साल सामान्य से करीब 25 फीसदी कम बारिश हुई है। राज्य के 51 जिलों में से 31 जिलों में सामान्य से कम बारिश हुई है। ऐसे में सोयाबीन की फसल को भारी नुकसान की आशंका हैं। सोपा ने तो इस साल देश में सोयाबीन की पैदावार करीब 17 फीसदी घटने का अनुमान दिया है। मध्यप्रदेश सरकार भी सर्वे में जुट गई है।
सोमवार को राज्य के कृषि कैबिनेट की बैठक भी हुई। जिसमें मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को हालात से निपटने के लिए जरूरी योजनाएं तैयार करने का आदेश दिया है। सोयाबीन के लिए सितंबर का महीना काफी अहम होता है और इस महीने के अंत से नई फसल की आवक शुरू हो जाती है।

07 September 2017

अमेरिका में भंडार बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल में तेजी

अमेरिका में भंडार बढ़ने के बावजूद कच्चे तेल में तेजी आई है और ब्रेंट का दाम 54 डॉलर के पार चला गया है। जबकि, नायमैक्स क्रूड में 49 डॉलर के ऊपर कारोबार हो रहा है। लंदन मेटल एक्सचेंज पर कॉपर लगातार नौंवे हफ्ते बढ़त बनाने में कामयाब हुआ है, जो पिछले 10 साल की सबसे लंबी तेजी है। डॉलर में आई गिरावट से रुपये को काफी सपोर्ट मिला है और रुपया 0.25 फीसदी मजबूत हो गया है। 1 डॉलर की कीमत 63.90 के नीचे आ गई है। डॉलर इंडेक्स पिछले 35 महीने के निचले स्तर पर लुढ़क गया है। वहीं ईसीबी का ग्रोथ और महंगाई पर अनुमान के बाद डॉलर के मुकाबले यूरो पिछले 2.5 साल के निचले स्तर पर है। ऐसे में सोने को जोरदार सपोर्ट मिला है और इसकी चमक बढ़ गई है। विदेशी बाजार में सोना 1350 डॉलर के पार चला गया है। ये एक साल के ऊपरी स्तर पर कारोबार कर रहा है। चांदी में भी तेजी आई है और ये 18 डॉलर के पार चली गई है जो पिछले 5 महीने का ऊपरी स्तर है।


केस्टर तेल का निर्यात 55 फीसदी बढ़ा

आर एस राणा
नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2017-18 के पहले चार महीनों अप्रैल से जुलाई के दौरान केस्टर तेल का निर्यात मूल्य के हिसाब से 55.47 फीसदी बढ़कर 2,292.59 करोड़ रुपये का हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष 2016-17 की समान अवधि में इसका निर्यात केवल 1,474.59 करोड़ रुपये का ही हुआ था।
पिछले साल केस्टर सीड का उत्पादन कम हुआ था, अतः उत्पादक मंडियों में केस्टर सीड का स्टॉक कम है जबकि तेल में निर्यात मांग अच्छी है। चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई पिछड़ रही है इसलिए आगे इसके भाव में और तेजी आने का अनुमान है।
कृषि मंत्रालय के अनुसार चालू खरीफ में केस्टर सीड की बुवाई कम होकर अभी तक केवल 5.84 लाख हैक्टेयर में ही हो पाई है जबकि पिछले साल की समान अवधि में इसकी बुवाई 6.56 लाख हैक्टेयर में हो चुकी थी।..........  आर एस राणा