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26 मार्च 2025

स्पिनिंग मिलों की खरीद सीमित होने से गुजरात में कॉटन रुकी, उत्तर भारत में तेज

नई दिल्ली। स्पिनिंग मिलों की मांग सीमित होने के कारण मंगलवार को गुजरात में कॉटन की कीमत स्थिर हो गई, जबकि उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम तेज हुए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव मंगलवार को 53,200 से 53,600 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो पर स्थिर हो गए।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव तेज होकर 5510 से 5530 रुपये प्रति मन बोले गए।हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 5450 से 5470 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव बढ़कर 5540 से 5560 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के भाव तेज होकर 53,200 से 53,300 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए।

देशभर की मंडियों में कपास की आवक 67,300 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स के साथ ही एनसीडीएक्स पर आज शाम को कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन के दाम तेज हुए।

स्पिनिंग मिलों की मांग सीमित होने के कारण गुजरात के साथ ही उत्तर भारत में कॉटन की कीमत स्थिर हो गई। व्यापारियों के अनुसार मौजूदा दाम पर जिनर्स की बिकवाली कमजोर है, तथा स्पिनिंग मिलों की पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। उधर विश्व बाजार में कॉटन के दाम हाल ही में कमजोर हुए थे, जिस कारण इसके आयात पड़ते सस्ते हैं तथा निर्यात सौदे सीमित मात्रा में ही हो रहे हैं। इसलिए कॉटन की कीमतों में आगे सुधार बन सकता है।

घरेलू बाजार में सीसीआई के पास कॉटन का भारी भरकम स्टॉक है, इसलिए आगामी दिनों में घरेलू बाजार में इसके भाव में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।

कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार खरीफ सीजन में कपास का उत्पादन 294.25 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलोग्राम) होने का अनुमान है, जो क‍ि इसके पहले के अनुमान 299.26 लाख गांठ के मुकाबले कम है।

कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया, सीएआई ने कॉटन के उत्पादन अनुमान में 6.45 लाख गांठ की कटौती की है। पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2024-25 में देश में 295.30 लाख गांठ, एक गांठ-170 किलो कॉटन के उत्पादन का अनुमान है, जबकि इससे पहले 301.75 लाख गांठ के उत्पादन का अनुमान था। पिछले फसल सीजन 2023-24 के दौरान देश में 325.29 लाख गांठ कॉटन का उत्पादन हुआ था।

सीमा शुल्क अधिसूचना के बाद नेपाल से खाद्य तेल आयात में कमी आने का अनुमान - एसईए

नई दिल्ली। उद्योग को उम्मीद है कि सीमा शुल्क विभाग द्वारा 18 मार्च को जारी अधिसूचना, जिसमें निर्यातकों/आयातकों को रियायती शुल्क के तहत आयातित वस्तुओं के लिए "मूल प्रमाण पत्र" के बजाय "मूल प्रमाण" प्रदान करने के लिए कहा गया है, इससे  नेपाल के साथ ही अन्य सार्क देशों से खाद्य तेल के बढ़ते आयात को कम करने में मदद मिलेगी।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अध्यक्ष संजीव अस्थाना ने एसईए सदस्यों को लिखे अपने मासिक पत्र में कहा है कि नेपाल से भारत में रिफाइंड सोया तेल और पाम तेल की भारी आवक, उत्पत्ति के नियमों का उल्लंघन करते हुए, घरेलू रिफाइनर और तिलहन किसानों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है। नेपाल से साफ्टा (दक्षिण एशियाई मुक्त व्यापार क्षेत्र) समझौते के तहत शून्य शुल्क पर खाद्य तेल का आयात न केवल उत्तरी और पूर्वी भारत में तबाही मचा रहा है, बल्कि अब दक्षिण और मध्य भारत में भी फैल रहा है।

उन्होंने लिखा है कि जो कुछ पहले ये आंशिक रूप से शुरू हुआ था, लेकिन अब खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। इससे इन क्षेत्रों में खाद्वय तेल रिफाइनरी उद्योग के अस्तित्व को खतरा पैदा हो रहा है साथ ही बाजार भी प्रभावित हो रहा है। इसके साथ ही खाद्य तेलों पर उच्च आयात शुल्क का उद्देश्य भी नहीं रह गया है।

उन्होंने लिखा है कि एसईए ने प्रधानमंत्री और अन्य प्रमुख मंत्रियों से नेपाल और अन्य सार्क देशों से खाद्य तेलों के आयात को विनियमित करने के लिए हस्तक्षेप करने और आवश्यक कार्रवाई करने का आग्रह किया है। जिस पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

सीमा शुल्क विभाग ने 18 मार्च 2025 को अधिसूचना संख्या 14/2025-सीमा शुल्क जारी की है, जिसके तहत निर्यातकों/आयातकों को रियायती शुल्क के तहत आयातित वस्तुओं के लिए 'मूल प्रमाण पत्र' के बजाय 'मूल प्रमाण' प्रदान करने की आवश्यकता है। इस कदम से निर्यातकों/आयातकों पर सटीक जानकारी प्रदान करने का दबाव पड़ने की उम्मीद है, जिससे साफ्टा के तहत नेपाल और अन्य सार्क देशों से खाद्य तेलों का प्रवाह कम हो जाएगा।


नेपाल से भारत में रिफाइंड सोयाबीन तेल और पाम तेल की भारी आमद, उत्पत्ति के नियमों का उल्लंघन करते हुए, घरेलू रिफाइनर और तिलहन किसानों को गंभीर रूप से प्रभावित कर रही है, जिससे सरकार को राजस्व का बड़ा नुकसान हो रहा है। नेपाल से SAFTA समझौते के तहत शून्य शुल्क पर खाद्य तेल का आयात न केवल उत्तरी और पूर्वी भारत में तबाही मचा रहा है, बल्कि अब दक्षिण और मध्य भारत में भी फैल रहा है।

अस्थाना ने कहा कि तिलहन आयात पर भारत की निर्भरता कम करने में सरसों महत्वपूर्ण फसल हैं। खाद्य तेलों में आत्मनिर्भरता हासिल करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बताए गए ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विजन को साकार करने के लिए विस्तार सेवाओं को मजबूत करना और सर्वोत्तम खेती प्रथाओं पर किसानों को जागरूक करना आवश्यक है।

उपज बढ़ाने के लिए एसईए के सतत सरसों मॉडल फार्म (एमएमएफ) का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2020-21 में शुरू की गई यह पहल किसानों को उन्नत कृषि पद्धतियों से लैस करने में सहायक रही है, जिससे उत्पादकता और लचीलापन बढ़ा है।

भारत का सरसों उत्पादन 2020-21 में 86 लाख टन से बढ़कर 2023-24 में 116 लाख का हो गया है। खेती का रकबा भी सालाना बढ़ा है, जो 2020-21 में 67 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2023-24 में लगभग 94 लाख हेक्टेयर हो गया।

24 मार्च 2025

न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीफ फसलों की खरीद 32.22 लाख टन के पार

नई दिल्ली। चालू खरीफ सीजन 2024 में नेफेड ने 20 मार्च तक न्यूनतम समर्थन मूल्य, एमएसपी पर उत्पादक राज्यों से 32.22 लाख टन तिलहन एवं दलहनी फसलों की खरीद कर चुकी है। केंद्र सरकार पीएसएस स्कीम के तहत चालू खरीफ सीजन में दलहन एवं तिलहनी फसलों की खरीद कर रही है।


सूत्रों के अनुसार खरीफ तिलहन की प्रमुख फसल सोयाबीन की किसानों से समर्थन मूल्य 4,892 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 33,60,628 टन की खरीद को मंजूरी दी हुई है, जिसमें से निगम ने 20 मार्च तक 14,71,780 टन सोयाबीन की खरीद की है। सोयाबीन की खरीद कर्नाटक से 18,199 टन, तेलंगाना से 81,129 टन, मध्य प्रदेश से 3,88,796 टन तथा गुजरात से 48,054 टन और महाराष्ट्र से 8,36,741 टन के अलावा तथा राजस्थान से 98,866 टन की हुई है।

चालू खरीफ सीजन में मूंगफली की खरीद समर्थन मूल्य 6,783 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 20,47,471 टन की खरीद को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी हुई है, जिसमें से निगम ने 20 मार्च तक 14,42,812 टन की खरीद की है। मूंगफली की खरीद गुजरात से 9,22,669 टन, राजस्थान से 4,38,488 टन और उत्तर प्रदेश से 79,611 टन की हुई है। कर्नाटक एवं हरियाणा तथा आंध्र प्रदेश की मंडियों से अभी तक समर्थन मूल्य पर मूंगफली की खरीद शुरू नहीं हो पाई है।

अन्य तिलहनी फसलों में सनफ्लावर की समर्थन मूल्य 7,280 रुपये प्रति क्विंटल की दर से कर्नाटक के किसानों से 20 मार्च तक 3,272 टन की खरीद की जा चुकी है।

खरीफ दलहन की प्रमुख फसल अरहर की न्यूनतम समर्थन मूल्य 7,550 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 20 मार्च तक 1,27,649 टन की खरीद की जा चुकी है। इसी तरह से मूंग की न्यूनतम समर्थन मूल्य 8,682 रुपये प्रति क्विंटल की दर से 1,76,474 टन की खरीद की जा चुकी है। उड़द की खरीद केवल 35.70 लाख टन ही हुई है।

महाराष्ट्र में चीनी उत्पादन 25 फीसदी घटा, 173 मिलों ने पेराई बंद की

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए चालू चीनी पेराई सीजन 2024-25 (अक्टूबर से सितंबर) के दौरान महाराष्ट्र की अधिकांश चीनी मिलें बंद गई, तथा चीनी के उत्पादन में भी 24.93 फीसदी की कमी आई है।  


राज्य के चीनी आयुक्तालय की रिपोर्ट के अनुसार, चालू चीनी पेराई सीजन 2024-25 में 173 चीनी मिलों ने 20 मार्च तक अपना परिचालन बंद कर दिया है, जबकि इस समय केवल 27 मिलों में ही पेराई चल रही है।

महाराष्ट्र में चालू पेराई सीजन 2024-25 के दौरान अभी चीनी का उत्पादन केवल 79.25 लाख का ही हुआ है, जोकि पिछले सीजन की समान अवधि के 105.58 लाख टन की तुलना में 24.93 फीसदी कम है।

इस समय राज्य की कुल 27 मिलों में ही गन्ने की पेराई चल रही है, जबकि 173 मिलों ने पेराई सत्र समाप्त कर दिया है। 20 मार्च तक राज्य भर की मिलों ने 838.41 लाख टन गन्ने की पेराई की है, जबकि पिछले सीजन की इसी अवधि के दौरान 1037.18 लाख टन की पेराई हुई थी। राज्य में चालू पेराई सीजन में चीनी की रिकवरी दर 9.45 फीसदी है, जो पिछले सीजन की समान अवधि के 10.18 फीसदी से कम है।

जानकारों के अनुसार, गन्ने की कम पैदावार और पेराई क्षमता में वृद्धि के कारण मिलों ने इस सीजन में पहले ही पेराई का काम बंद कर दिया है। पेराई सत्र की शुरुआत में देरी, इथेनॉल उत्पादन की और चीनी का रुख और गन्ने की पैदावार में कमी के कारण राज्य में चीनी का उत्पादन भी पिछले सीजन की तुलना में कम हुआ है।

कोल्हापुर संभाग की 40 मिलों ने 202.21 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 224.09 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। क्षेत्र की सभी चीनी मिलों का पेराई सत्र समाप्त हो चुका है। कोल्हापुर डिवीजन में राज्य में सबसे अधिक 11.08 फीसदी की रिकवरी प्राप्त हुई है। पुणे संभाग की 31 में से 24 मिलों की पेराई समाप्त हो चुकी है। संभाग में 199.24 लाख टन गन्ने की पेराई और 191.26 लाख क्विंटल चीनी उत्पादन हुआ है। औसत चीनी रिकवरी 9.6 फीसदी है। सोलापुर डिवीजन की सभी 45 मिलें बंद हो गई हैं। सभी मिलों ने कुल 130.36 लाख टन गन्ने की पेराई कर 105.7 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। सोलापुर में चीनी रिकवरी 8.11 फीसदी है।

अहिल्यानगर संभाग की 26 में से 20 फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। क्षेत्र की मिलों ने 8.88 फीसदी चीनी उपज के साथ 112.97 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 100.31 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। छत्रपति संभाजीनगर विभाग में 22 में से 19 मिलें बंद हो गई हैं। मिलों ने 8 फीसदी चीनी रिकवरी के साथ 80.32 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 64.29 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है।

नांदेड़ संभाग की 29 में से 24 मिलें बंद हो चुकी हैं और उन्होंने 98.49 लाख टन गन्ने की पेराई की है और 95.1 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। विभाग की चीनी रिकवरी 9.66 फीसदी है। अमरावती संभाग में 4 में से 1 मिल बंद हो गई है। 11.27 लाख टन गन्ने की पेराई करके 10.03 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया गया है। विभाग की रिकवरी दर 8.9 फीसदी है। नागपुर संभाग में तीन मिलों ने 3.55 लाख टन गन्ने की पेराई कर 1.81 लाख क्विंटल चीनी का उत्पादन किया है। नागपुर संभाग में रिकवरी दर राज्य में सबसे कम 5.1 फीसदी है।

चालू फसल सीजन में खरीदी हुई दो लाख गांठ से ज्यादा कॉटन बेच चुकी है सीसीआई

नई दिल्ली। पहली अक्टूबर 2024 से शुरू हुए चालू फसल सीजन 2024-25 में खरीदी हुई 2,08,200 गांठ, एक गांठ - 170 किलो कॉटन की बिक्री सीसीआई अभी तक कर चुकी है।


निगम ने सीसीआई ने 17 मार्च 2025 को ई नीलामी के माध्यम से 113,700 गांठ, एक गांठ - 170 किलो कॉटन की बिक्री की। इसमें से 94,500 गांठ की खरीद मिलों ने की जबकि 33,200 गांठ कॉटन की खरीद व्यापारियों ने की।

व्यापारियों के अनुसार सीसीआई घरेलू बाजार की तुलना में ज्यादा दाम पर कॉटन की बिकवाली कर रही है, तथा चालू सीजन में सीसीआई के पास भारी भरकम कॉटन का स्टॉक है। इसलिए कॉटन की कीमतों में तेजी, मंदी सीसीआई के बिक्री दाम पर भी निर्भर करेगी।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुरुवार को गुजरात में लगातार चौथे दिन कॉटन की कीमत तेज हुई जबकि इस दौरान उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम कमजोर हो गए।

गुजरात के अहमदाबाद में 29 शंकर-6 किस्म की कॉटन के भाव गुरुवार को 50 रुपये तेज होकर दाम 53,500 से 53,800 रुपये प्रति कैंडी, एक कैंडी-356 किलो हो गए।

पंजाब में रुई के हाजिर डिलीवरी के भाव 10 रुपये नरम होकर 5560 से 5570 रुपये प्रति मन बोले गए। हरियाणा में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 10 रुपये घटकर 5520 से 5550 रुपये प्रति मन बोले गए। ऊपरी राजस्थान में रुई के भाव हाजिर डिलीवरी के भाव 10 रुपये कमजोर होकर 5540 से 5600 रुपये प्रति मन बोले गए। खैरथल लाइन में कॉटन के भाव 53,400 से 53,500 रुपये कैंडी, एक कैंडी-356 किलो बोले गए। देशभर की मंडियों में कपास की आवक 74,200 गांठ, एक गांठ-170 किलो की हुई।

घरेलू वायदा बाजार एमसीएक्स के साथ ही एनसीडीएक्स पर आज शाम को कॉटन की कीमतों में तेजी का रुख रहा। आईसीई के इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग में कॉटन के दाम तेज हुए।

स्पिनिंग मिलों की मांग बनी रहने के कारण गुजरात में कॉटन की कीमत चौथे दिन भी तेज हुई, लेकिन उत्तर भारत के राज्यों में इसके दाम नरम हो गए। व्यापारियों के अनुसार नीचे दाम पर जिनर्स की बिकवाली कमजोर है, तथा स्पिनिंग मिलों की पास कॉटन का बकाया स्टॉक कम है। अत: घरेलू बाजार में कॉटन की कीमतों में हल्का सुधार बन सकता है। विश्व बाजार में कॉटन के दाम हाल ही में तेज तो हुए हैं, लेकिन अभी भी घरेलू बाजार की तुलना में नीचे बने हुए हैं जिस कारण इसके आयात पड़ते सस्ते हैं तथा निर्यात सौदे सीमित मात्रा में ही हो रहे हैं।

कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार खरीफ सीजन में कपास का उत्पादन 294.25 लाख गांठ (एक गांठ 170 किलोग्राम) होने का अनुमान है, जो क‍ि इसके पहले के अनुमान 299.26 लाख गांठ के मुकाबले कम है।

चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों के दौरान डीओसी का 12 फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। चालू वित्त वर्ष 2024-25 की पहले 11 महीनों अप्रैल से फरवरी के दौरान डीओसी के निर्यात में 12 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 3,933,349 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इनका निर्यात 4,490,055 टन का ही हुआ था। इस दौरान सरसों डीओसी के साथ ही कैस्टर डीओसी के निर्यात में कमी आई है।


सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार फरवरी में देश से डीओसी के निर्यात में 36 फीसदी की कमी आकर कुल निर्यात 330,319 टन का ही हुआ है, जबकि पिछले साल फरवरी में इनका निर्यात 515,704 टन का ही हुआ था।

चालू वर्ष के पहले 11 महीनों (अप्रैल 24 से फरवरी, 2025) में सोया डीओसी का निर्यात थोड़ा बढ़कर 19.40 लाख टन का हुआ, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 19.34 लाख टन का ही निर्यात हुआ था। इसका श्रेय जर्मनी और फ्रांस जैसे यूरोपीय खरीदारों द्वारा अधिक आयात को जाता है। हालांकि, तेल वर्ष अक्टूबर 2024 से फरवरी 2025 के 5 महीने के दौरान सोया डीओसी का निर्यात 26 फीसदी कम होकर 10.31 लाख टन का ही हुआ, जबकि अक्टूबर 2023 से फरवरी 2024 के दौरान इसका निर्यात 13.47 लाख टन का हुआ था।

पिछले एक महीने में विश्व बाजार में अत्यधिक आपूर्ति और कमजोर मांग के कारण सोयाबीन डीओसी की कीमत एक महीने पहले के 380 डॉलर की तुलना में 20 डॉलर घटकर 360 डॉलर प्रति टन रह गई, जबकि आयातक देशों की मांग की कमी के कारण सरसों डीओसी की निर्यात कीमतों में भारी गिरावट आई, तथा इसकी कीमत 80 डॉलर (एफएएस कांडला) से अधिक कमजोर हो गई तथा इसके दाम 17 मार्च, 2025 को 190 डॉलर प्रति टन पर आ गई, जबकि एक महीने पहले यह 270 डॉलर प्रति टन थी। अगस्त 2023 से डी ऑयल राइस ब्रान डीओसी के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है, जिस कारण देश के घरेलू उत्पादकों को भारी नुकसान हुआ है तथा इसकी कीमत घरेलू बाजार में एक साल पहले के 13,500 रुपये से गिरकर 8,500 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई है।

भारतीय बंदरगाह पर फरवरी में सोया डीओसी का भाव कमजोर होकर 370 डॉलर प्रति टन रह गया, जबकि जनवरी में इसका दाम 378 डॉलर प्रति टन था। इस दौरान सरसों डीओसी का मूल्य फरवरी में भारतीय बंदरगाह पर 248 डॉलर प्रति रहा, जबकि जनवरी में इसका भाव 270 डॉलर प्रति टन ही था। इस दौरान कैस्टर डीओसी का दाम जनवरी के 81 डॉलर प्रति टन से थोड़ा बढ़कर फरवरी में 82 डॉलर प्रति टन का हो गया।

जनवरी में कैस्टर तेल का निर्यात 17 फीसदी घटा - एसईए

नई दिल्ली। जनवरी 2025 में कैस्टर तेल के निर्यात में 16.98 फीसदी की गिरावट आकर कुल निर्यात 44,168 टन का हुआ है, जबकि पिछले साल जनवरी में इसका निर्यात 53,204 टन का ही हुआ था।


साल्वेंट एक्सट्रेक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, एसईए के अनुसार जनवरी में कैस्टर तेल का निर्यात मूल्य के हिसाब से 566.01 करोड़ रुपये का हुआ है, जबकि पिछले साल जनवरी में इसका निर्यात 652.74 करोड़ रुपये का हुआ था।

व्यापारियों के अनुसार चालू सीजन में बुआई में आई कमी से कैस्टर सीड का उत्पादन कम होने का अनुमान है। हालांकि उत्पादक मंडियों में नई फसल की आवकों में पहते की तुलना में बढ़ोतरी हुई है, तथा आगामी दिनों में आवक और बढ़ेगी।

गुजरात की मंडियों में शनिवार को कैस्टर सीड के भाव 1,240 से 1,260 रुपये प्रति 20 किलो पर स्थिर हो गए। इस दौरान राजकोट में कमर्शियल तेल के भाव 15 रुपये घटकर 1,280 रुपये और एफएसजी के 15 रुपये कमजोर होकर 1,290 रुपये प्रति 10 किलो रह गए।

गुजरात की मंडियों में कैस्टर सीड की दैनिक आवक शनिवार को 38 से 40 हजार बोरी, एक बोरी 35 किलो की हुई, जिसमें से जिसमें से 2,000 से 2,200 बोरी सीधे मिल पहुंच का व्यापार हो रहा है। होली की छुट्टियों के कारण राजस्थान की मंडियों में इसकी आवक नहीं के बराबर हुई।

कृषि मंत्रालय के दूसरे आरंभिक अनुमान के अनुसार फसल सीजन 2024-25 के दौरान कैस्टर सीड का उत्पादन 18.22 लाख टन ही होने का अनुमान है, जोकि इसके पिछले फसल सीजन की तुलना में 8 फीसदी कम है।

कृषि मंत्रालय के अनुसार खरीफ सीजन में कैस्टर सीड की बुआई 12 फीसदी घटकर केवल 8.67 लाख हेक्टेयर में ही हुई थी।